- उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार रविवार को हो सकता है.
- सरकार में इस वक्त 54 मंत्री हैं, जिनमें 21 कैबिनेट मंत्री हैं. मौजूदा सीटों के हिसाब से 60 मंत्री हो सकते हैं
- इन्हीं 6 सीटों पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है. संभावित नामों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी हैं
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार बनने और बिहार में सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार के बाद अब उत्तर प्रदेश से बड़ी खबर आ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को हो सकता है. इस दौरान छह नये चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.
कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आज शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करेंगे. उनकी ये मुलाकात शाम 6:30 बजे होगी. माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा हो सकती है.
उत्तर प्रदेश सरकार में इस वक्त कुल 54 मंत्री हैं. इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं, 14 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं और 19 राज्य मंत्री हैं. राज्य में विधानसभा की 403 सीटों के हिसाब से अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं. ऐसे में छह सीटें खाली हैं. बताया जा रहा है कि इन खाली सीटों पर नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है.
यूपी में मंत्री बनने वाले संभावित चेहरे
- भूपेंद्र चौधरी - जाट (ओबीसी) - पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी, मुरादाबाद के रहने वाले हैं
- मनोज पांडेय - ब्राह्मण (सवर्ण) - सपा के बागी और रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक हैं.
- पूजा पाल - पाल (ओबीसी) - सपा की बागी और कौशांबी के चायल से विधायक हैं
- अशोक कटारिया - गुर्जर (ओबीसी) - एमएलसी - बिजनौर के रहने वाले हैं.
- कृष्णा पासवान - पासी (एससी) - फतेहपुर की खागा से विधायक हैं.
- सुरेश पासी - पासी (एससी) - पासी समाज से अमेठी के जगदीशपुर से विधायक हैं.
- सुरेंद्र दिलेर - वाल्मीकि (एससी) - अलीगढ़ की खैर से विधायक हैं.
- आशीष सिंह आशु - कुर्मी (ओबीसी) - हरदोई की मल्लवां से विधायक हैं.
यूपी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद विभागों में भी फेरबदल होगा. चूंकि छह नए मंत्री बनाए जा सकते हैं, ऐसे में नए मंत्रियों को विभाग देने के लिए वर्तमान मंत्रियों के विभागों में अदला-बदली करके विभाग आवंटित किए जा सकते हैं.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी में चुनाव होने वाले हैं. माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया जा सकता है.
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