- वायुसेना AGNI नामक आधुनिक कॉम्बैट सिम्युलेटर सिस्टम खरीदने जा रही है जो तीनों सेनाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगा
- AGNI में पायलट, एयर डिफेंस कंट्रोलर और ग्राउंड कमांडर एक साथ वर्चुअल युद्धक्षेत्र में ट्रेनिंग कर सकेंगे
- यह सिस्टम फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल और अन्य युद्ध संसाधनों का समग्र सिमुलेशन करेगा
भारतीय वायुसेना अब एक बेहद आधुनिक कॉम्बैट सिम्युलेटर सिस्टम खरीदने जा रही है. इसका नाम AGNI रखा गया है. AGNI- यानी एयर कॉम्बैट, ग्राउंड प्लानिंग एंड नेटवर्क इंटीग्रेटेड एक सिस्टम. यह सिस्टम पुराने फ्लाइट सिम्युलेटर से काफी अलग होगा. इसमें सिर्फ पायलट ही नहीं, बल्कि एयर डिफेंस कंट्रोलर और ग्राउंड कमांडर भी एक साथ ट्रेनिंग कर सकेंगे.
सिम्युलेटर एक नकली सेटअप होता है जो असली जैसा काम करता है. जैसे फ्लाइट सिम्युलेटर में पायलट असली जहाज उड़ाए बिना ही कॉकपिट में बैठकर उड़ान भरने की प्रैक्टिस करता है.
इसकी जरूरत क्यों?
AGNI सिस्टम आधुनिक युद्ध जैसी स्थिति तैयार करेगा. इसमें वायुसेना, थलसेना और नौसेना के जवान एक ही वर्चुअल युद्धक्षेत्र में काम करेंगे.
आज के युद्ध सिर्फ लड़ाकू विमान तक सीमित नहीं हैं. अब रडार नेटवर्क, सैटेलाइट डेटा लिंक, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, ड्रोन और साइबर ऑपरेशन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. इसी को ध्यान में रखकर यह सिस्टम तैयार किया जा रहा है.
इस सिस्टम में फाइटर पायलट वर्चुअल कॉकपिट में उड़ान भरेंगे. वहीं एयर डिफेंस कंट्रोलर बड़ी स्क्रीन पर सैकड़ों टारगेट ट्रैक करेंगे. ग्राउंड कमांडर तीनों सेनाओं के संसाधनों को एक साथ ऑपरेट करेंगे.
यह भी पढ़ेंः भारी वजन, ऊंचाई और हर मौसम में ऑपरेशन, IAF को मिलेंगे नए हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर

AGNI सिस्टम चार हिस्सों में काम करेगा.
- पहला हिस्सा फाइटर कंट्रोलर सेक्शन होगा. इसमें बड़ी पैनोरमिक स्क्रीन लगाई जाएंगी. ये एक साथ हजार से ज्यादा हवाई खतरों को दिखा सकेंगी. इसमें फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और मिसाइल शामिल होंगे.
- दूसरा हिस्सा हाई-फिडेलिटी कॉकपिट का होगा. इसमें सुखोई-30 MKI, मिराज-2000 और राफेल जैसे विमानों की ट्रेनिंग दी जाएगी. दुश्मन देशों के F-16, F-22 और चीन के J-10 और J-11 जैसे विमानों का भी सिमुलेशन होगा. इन कॉकपिट में टेकऑफ मोड और हथियार दागने जैसी वास्तविक फीलिंग मिलेगी. पायलटों को बारिश, धुंध, बादल और रात जैसी कठिन परिस्थितियों में भी ट्रेनिंग दी जाएगी.
- तीसरा हिस्सा ग्राउंड एनवायरमेंट सेक्शन होगा. इसे सबसे जटिल सिस्टम माना जा रहा है. इसमें टैंक, मिसाइल सिस्टम, रडार, युद्धपोत, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट कैरियर और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी दिखाया जाएगा.
- चौथा हिस्सा सुपरवाइजर सेक्शन होगा. इसमें इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग के दौरान अचानक नए खतरे जोड़ सकेंगे. मौसम खराब कर सकेंगे या संचार बाधित कर सकेंगे. पूरी एक्सरसाइज की रिकॉर्डिंग भी होगी, ताकि बाद में उसका विश्लेषण किया जा सके.
फायदा क्या होगा?
आजकल युद्ध कई मोर्चों पर लड़े जाते हैं. पहले टैंक और फाइटर जेट तक युद्ध सीमित थे. लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब कोई भी युद्ध जीतने के लिए तीनों सेनाओं का एक साथ कार्रवा करना जरूरी है. यह नया सिस्टम भारतीय सेना की संयुक्त युद्ध तैयारी को और मजबूत करेगा.
यह भी पढ़ेंः मैदान, रेगिस्तान और पहाड़... आकाशतीर हर जगह दुश्मन से करेगा भारतीय सेना की सुरक्षा, जानें कैसे
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं