भारत ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) को लेकर बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने पहली बार इस पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के प्रोटोटाइप बनाने के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं.
HAL नहीं, अब प्राइवेट कंपनियों पर भरोसा
इस बार सरकार पारंपरिक तौर पर HAL पर निर्भर रहने के बजाय निजी कंपनियों को मौका दे रही है. एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने बोली आमंत्रित की है, जिसमें चुनी गई कंपनी को पूरे विमान के निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी.
क्या है AMCA प्रोजेक्ट?
AMCA भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट होगा, जिसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि दुश्मन के रडार पर इसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो. इसकी तुलना अमेरिका के F-35, चीन के J-35 और रूस के Su-57 जैसे आधुनिक विमानों से की जा रही है.
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स्टील्थ टेक्नोलॉजी की खासियत
AMCA में रडार से बचने के लिए खास मैटेरियल और डिजाइन का इस्तेमाल होगा. इसके हथियार विमान के अंदर (Internal Weapon Bay) रखे जाएंगे, जिससे रडार पर इसकी पहचान और मुश्किल हो जाएगी. यही इसे ‘घोस्ट फाइटर' बनाता है.
5 प्रोटोटाइप और 1800 टेस्ट उड़ानें
प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को 5 उड़ने वाले प्रोटोटाइप और 1 टेस्ट मॉडल तैयार करना होगा. रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए सख्त टाइमलाइन तय की है.
- पहला प्रोटोटाइप 30 महीने में उड़ान भरेगा.
- 64 महीनों में सभी 5 प्रोटोटाइप तैयार होंगे.
- 84 महीनों में 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी.
पूरी सिस्टम डेवलपमेंट की जिम्मेदारी
चुनी गई कंपनी को एयरफ्रेम से लेकर इंजन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्यूल सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल तक सब कुछ तैयार करना होगा. यानी पूरा फाइटर जेट एक ही इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म पर बनेगा.
क्यों जरूरी है AMCA?
भारतीय वायुसेना लगातार फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है. जहां जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है, वहीं मौजूदा संख्या करीब 30 है. ऐसे में AMCA भविष्य की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा.
भारत के लिए गेम चेंजर प्रोजेक्ट
अगर AMCA प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो खुद पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट डिजाइन और बना सकते हैं. इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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