पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के कारण कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे बाढ़ की आशंका गहरा गई है. खासकर ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता और बुरीडिहिंग जैसी प्रमुख नदियों ने खतरे का नया स्तर छू लिया है.

- ब्रह्मपुत्र नदी के इलाकों में हालत गंभीर हो गई है असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर 105.85 मीटर तक पहुंच चुका है, जो खतरे के स्तर से 0.15 मीटर ऊपर है. वहीं जोरहाट जिले के नेमाटीघाट में ब्रह्मपुत्र नदी 86.6 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से 1.06 मीटर ऊपर है. यहां पर जल स्तर प्रति घंटे 100 मिमी की गति से और भी बढ़ रहा है.
- बराक नदी तटवर्ती जिलों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं. बराक बेसिन में धलेश्वर नदी का जलस्तर हैलाकांडी जिले के घरमुरा में 32.12 मीटर तक पहुंच चुका है, जो खतरे के स्तर से 4.07 मीटर ऊपर है. बराक नदी का ही एक अन्य स्थान करिमगंज जिले के बदरपुर घाट में जलस्तर 17.06 मीटर दर्ज किया गया, जो 0.21 मीटर खतरे के स्तर से ऊपर है.
- तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में बुरीडिहिंग नदी 136.58 मीटर तक बह रही है, जो खतरे के निशान से 2.16 मीटर ऊपर है.
- करिमगंज जिले में कुशियारा नदी 15.38 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के स्तर से 0.44 मीटर ज्यादा है.
- गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी (साउथ) नदी 78.91 मीटर तक पहुंच गई है, जो 0.49 मीटर खतरे के निशान से ऊपर है.
- नागांव जिले के कामपुर में कोपिली नदी 61.92 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के स्तर से 1.42 मीटर ऊपर है.
- त्रिपुरा के पश्चिमी भाग में हाओरा नदी 11.58 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के स्तर से 0.88 मीटर ऊपर है और प्रति घंटे 70 मिमी की गति से बढ़ रही है.

बाढ़ का बढ़ता खतरा
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है. लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने तटीय इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. राहत व बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और प्रभावित इलाकों में निगरानी तेज कर दी गई है.
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पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के कारण कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे बाढ़ की आशंका गहरा गई है. खासकर ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता और बुरीडिहिंग जैसी प्रमुख नदियों ने खतरे का नया स्तर छू लिया है।
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