- शुभेंदु अधिकारी का जन्म 1970 में पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में एक समृद्ध राजनीतिक परिवार में हुआ था.
- उनके पिता शिशिर अधिकारी तीन बार सांसद चुने गए और विभिन्न संसदीय समितियों में सक्रिय रहे हैं.
- शुभेंदु अधिकारी ने 1989 में कांग्रेस छात्र परिषद से राजनीतिक सफर शुरू किया, फिर TMC होते हुए BJP में आए.
Suvendu Adhikari Family: बंगाल में पहली बार BJP का कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले शुभेंदु अधिकारी असल मायने में बंगाल के अधिकारी बन गए हैं. बंगाल में शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु अधिकारी को बीजेपी विधायक दल का नेता घोषित किया. अब से थोड़ी देर बाद शुभेंदु बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बंगाल के अगले सीएम बनने वाले शुभेंदु अधिकारी का का सियासी सफर तो बहुत लोग जान रहे होंगे लेकिन उनके निजी जिंदगी की कहानी से अभी भी बहुत लोग परिचित नहीं है. आइए जानते हैं, शुभेंदु अधिकारी के निजी जीवन से जुड़ी अहम जानकारियां.
1970 में पूर्वी मेदिनीपुर में जन्म
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में एक समृद्ध राजनीतिक परिवार में हुआ था. उनके पिता, शिशिर अधिकारी भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं. शिशिर अधिकारी तीन बार के सांसद हैं. शिशिर अधिकारी पहली बार साल 2009 की 15वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए, इसके बाद साल 2014 की 16वीं लोकसभा और साल 2019 17वीं लोकसभा के लिए फिर चुने गए.
शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की सलाहकार समिति, ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी स्थायी संसदीय समिति के सदस्य की भूमिका निभाई. शुभेंदु अधिकारी की मां का नाम गायत्री अधिकारी है.

परिवार में सीखीं राजनीति की बारिकियां
शुभेंदु ने राजनीति की शुरुआती बारीकियां अपने परिवार में ही सीखीं. उन्होंने अपना राजनीतिक करियर 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद के माध्यम से शुरू किया. उस दौर में पूरे बंगाल में वामपंथी छात्र संगठनों का एकछत्र दबदबा था, ऐसे में एक विपक्षी छात्र नेता के रूप में अपनी जगह बनाना उनके संघर्ष और नेतृत्व क्षमता का पहला बड़ा प्रमाण था.
शुभेंदु के शादी नहीं की है, भाई भी बीजेपी में
शुभेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की है. उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी बीजेपी में है. शुभेंदु के एक भाई दिब्येंदु अधिकारी भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद रह चुके हैं. अभी शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ देव की हत्या के बाद भी शुभेंदु अधिकारी के भाई लगातार चर्चा में है.
शुभेंदु ने क्यों नहीं की शादी, खुद बताया था?
शुभेंदु के भाई सौमेंदु ने भी कुछ ही महीने पहले शादी की है. अब सवाल यह है कि इतने सक्सेसफुल होने के बाद भी आखिर शुभेंदु ने शादी क्यों नहीं की. 2021 के चुनाव के दौरान एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने ये बात खुद बताई थी.
शुभेंदु अधिकारी ने कहा वह 1987 से छात्र राजनीति से जुड़े रहे. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को राजनीति को पूरी तरह से समर्पित कर दिया. शादी न करने के सवाल पर उन्होंने अपने इलाके के तीन स्वतंत्रता सैनानियों का जिक्र किया. सतीश सामंतो, सुशील धारा, अजय मुखर्जी. उन्होंने कहा कि ये तीनों बहुत ही बढ़िया स्वतंत्रता सैनानी थे और तीनों ने ही शादी नहीं की थी. शुभेंदु ने कहा कि उन्होंने इन तीनों के नक्शे कदम पर चलते हुए शादी न करने का फैसला लिया और खुद को जनता को समर्पित कर दिया.

1995 में कांथी नगर पालिका में पार्षद के रूप में चुनकर अपने चुनावी सफर की औपचारिक शुरुआत करने वाले शुभेंदु ने पहले ममता के साथ राजनीति की. फिर ममता से लड़कर अपनी राजनीति चमकाई, और अब वो बंगाल में सीएम की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं.
शुभेंदु अधिकारी के पास 85.87 लाख रुपए की संपत्ति
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नामाकंन के समय निर्वाचन आयोग में जमा किए गए शुभेंदु के हलफनामे के मुताबिक, उनके पास सिर्फ 12 हजार रुपये नकद हैं. उनके नाम पर कोई कार नहीं है और न ही उन्होंने किसी सोने के आभूषण की जानकारी दी है. हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब 85.87 लाख रुपये है. उन पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है.
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