सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)
- छात्र राजनीति के दौर से दोनों नेताओं के बीच रहा कनेक्शन
- दोनों ही नेता जेपी आंदोलन की उपज माने जाते हैं
- चारा घोटाले का मामला उजागर करने में भी मोदी की अहम भूमिका
2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव हारने के बाद बिहार बीजेपी के नेता सुशील कुमार मोदी पार्टी में हाशिए पर चले गए. उन चुनावों में सुशील मोदी ही पार्टी का चेहरा थे लेकिन चुनाव हारने के बाद यह माना गया कि शीर्ष नेतृत्व उनसे नाराज हो गया. अब पिछले तीन महीने में एक के बाद एक ताबड़तोड़ प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने जिस तरह से लालू प्रसाद के परिवार को घेरा, उसकी परिणति महागठबंधन की टूट के रूप में हुई और एक बार फिर बीजेपी सूबे की सत्ता में पहुंची. सुशील मोदी से जुड़ी 5 बातों पर एक नजर :
1. 2015 के बिहार चुनाव को हारने के बाद पार्टी आलाकमान के साथ सुशील मोदी के रिश्ते सहज नहीं रहे. उसके बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा भी नहीं भेजा. सिर्फ इतना ही नहीं नित्यानंद राय को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.
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2. 1975 में जेपी आंदोलन के दौर में सुशील मोदी ने पटना यूनवर्सिटी में एमएससी की पढा़ई छोड़कर राजनीति की राह पकड़ ली. शुरुआत से ही आरएसएस से संबद्ध रहे.
3. 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में सुशील मोदी जनरल सेक्रेट्री चुने गए. उस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव बने.
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4. 1990 में पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे. 1996-2004 के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे. 1996 में ही पटना हाई कोर्ट में लालू प्रसाद के खिलाफ जनहित याचिका दायर की. बाद में यह मामला चारा घोटाले के रूप में जाना गया.
VIDEO-नीतीश छठी बार बने मुख्यमंत्री
5. 2005 में राज्य की सत्ता में एनडीए के आने के बाद वह पहली बार उपमुख्यमंत्री बने. 2013 तक वह इस पद पर रहे. अब तीसरी बार वह नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री बने हैं.
1. 2015 के बिहार चुनाव को हारने के बाद पार्टी आलाकमान के साथ सुशील मोदी के रिश्ते सहज नहीं रहे. उसके बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा भी नहीं भेजा. सिर्फ इतना ही नहीं नित्यानंद राय को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.
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2. 1975 में जेपी आंदोलन के दौर में सुशील मोदी ने पटना यूनवर्सिटी में एमएससी की पढा़ई छोड़कर राजनीति की राह पकड़ ली. शुरुआत से ही आरएसएस से संबद्ध रहे.
3. 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में सुशील मोदी जनरल सेक्रेट्री चुने गए. उस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव बने.
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4. 1990 में पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे. 1996-2004 के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे. 1996 में ही पटना हाई कोर्ट में लालू प्रसाद के खिलाफ जनहित याचिका दायर की. बाद में यह मामला चारा घोटाले के रूप में जाना गया.
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5. 2005 में राज्य की सत्ता में एनडीए के आने के बाद वह पहली बार उपमुख्यमंत्री बने. 2013 तक वह इस पद पर रहे. अब तीसरी बार वह नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री बने हैं.
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