- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराधों में जमानत सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी समान रूप से लागू होते हैं.
- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आरोपी को समानता के आधार पर जमानत देने के आदेश को SC ने रद्द कर दिया.
- आरोपी ने बड़े पैमाने पर खाद्यान्न की आपूर्ति में धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान से रकम हड़पी थी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जघन्य अपराधों में जमानत से जुड़े सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी समान रूप से लागू होते हैं, क्योंकि ऐसे अपराध नागरिकों के आर्थिक कल्याण और जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वित्तीय अपराध के आरोपी को केवल समानता के आधार पर जमानत दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी की सक्रिय भूमिका, आपराधिक इतिहास और बार-बार समान अपराध करने की प्रवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार नहीं किया.
आर्थिक धोखाधड़ी पर भी लागू होते हैं सिद्धांत
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि भले ही पहले के फैसले जघन्य हिंसक अपराधों के संदर्भ में थे, लेकिन उनमें निहित सिद्धांत आर्थिक धोखाधड़ी जैसे मामलों पर भी लागू होते हैं, जहां लोगों की मेहनत की कमाई ठगी जाती है.
ये मामला बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धमकी के आरोपों से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 11.52 करोड़ रुपये से अधिक के खाद्यान्न की आपूर्ति लेकर केवल 5.02 करोड़ रुपये का भुगतान किया और शेष राशि फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के जरिए हड़प ली. जांच में कई फर्जी पहचान, लंबी फरारी और बार-बार दर्ज एफआईआर सामने आईं.
समानता के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत नहीं: कोर्ट
अदालत ने कहा कि ऐसे आरोपी को केवल समानता के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत नहीं है और इससे समाज के लिए जोखिम पैदा होता है. इसी के साथ अपील स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का जमानत आदेश रद्द कर दिया.
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