सुप्रीम कोर्ट ने बेतरतीब और बेहिसाब जनहित याचिकाएं दाखिल करने वाले अधिवक्ता को कड़ी फटकार लगाई. डॉक्टरों की मेडिकल डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की जांच की व्यवस्था बनाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इन्कार किया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील नरेंद्र गोस्वामी से कहा कि आप हर हफ्ते PIL दाखिल कर रहे हैं. अखबार में कोई खबर देखते ही उसी आधार पर याचिका दाखिल कर देते हैं. आपका मकसद इसके जरिए पब्लिसिटी पाना है. आपने PIL दाखिल करने को जैसे 'फैक्ट्री' बना लिया है.
नकली, फर्जी डिग्री से जुड़ी याचिका
कोर्ट पर इस तरह याचिकाओं का बोझ मत डालिए. देश में डॉक्टरों की मेडिकल डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य एवं भरोसेमंद जांच की व्यवस्था बनाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नरसिम्हा की बेंच सुनवाई कर रही थी.वकील नरेंद्र गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था जरूरी है ताकि नकली, फर्जी डिग्री वाले व्यक्ति डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस न कर सकें.
पब्लिसिटी के लिए ऐसी याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट ने नकली और जाली मेडिकल डिग्री के मुद्दे पर दायर इस याचिका को खारिज कर दिया. खुद पेश हुए याचिकाकर्ता वकील ने मेडिकल नियमों की ऑडिटिंग और इस मामले की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की थी. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने याचिकाकर्ता को पब्लिसिटी के लिए ऐसी याचिकाएं बार-बार दायर करने से रोका. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा: आप हर हफ्ते एक जनहित याचिका दायर करते हैं. आप किस तरह की याचिकाएं तैयार करते हैं? आपने इसे एक कारखाना बना दिया है. हर हफ्ते आप रिट याचिका डाल देते हैं. खबर देखते ही आप डॉराफ्ट तैयार कर लेते हैं. अपनी मांगों को तो देखिए, क्या आप कभी अपना दिमाग भी लगाते हैं?
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ऐसी याचिकाओं से परेशान न करें
उन्होंने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या ऐसी PIL लोकप्रियता के मकसद से दायर की जाती हैं. आप ऐसा क्यों करते हैं, सिर्फ इसलिए कि रिट याचिका दायर करना आसान है और कोई भी इसे दायर करके पब्लिसिटी पा सकता है? बस हमें इस तरह की याचिकाओं से परेशान न करें. हालांकि, याचिकाकर्ता ने यह समझाने की कोशिश की कि याचिका में अहम सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने आंकड़े भी दिए कि हर चार डॉक्टरों में से कम से कम एक के पास नकली या जाली डिग्री है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
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