विज्ञापन
This Article is From Feb 08, 2022

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन पोस्ट पर लोगों को "परेशान" करने के लिए त्रिपुरा पुलिस को लगाई फटकार 

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने त्रिपुरा राज्य की ओर से पेश होने वाले वकील को चेतावनी दी कि अगर पुलिस "लोगों को परेशान करना" बंद नहीं करती है तो कोर्ट गृह सचिव और संबंधित पुलिस अधिकारियों को तलब करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन पोस्ट पर लोगों को "परेशान" करने के लिए त्रिपुरा पुलिस को लगाई फटकार 
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वासन दिया कि अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा.
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद राज्य में कथित सांप्रदायिक हिंसा के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट के लिए लोगों को भेजे गए नोटिस को लेकर सोमवार को त्रिपुरा पुलिस की खिंचाई की और उन पार्टियों को "परेशान" करने पर आगाह किया जिन्हें पुलिस ने प्रि अरेस्ट नोटिस भेजा था. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने त्रिपुरा राज्य की ओर से पेश होने वाले वकील को चेतावनी दी कि अगर पुलिस "लोगों को परेशान करना" बंद नहीं करती है तो कोर्ट गृह सचिव और संबंधित पुलिस अधिकारियों को तलब करेगी.

"जब हमने एक आदेश पारित किया है, तो आपकी हिम्मत कैसे हुई इसे लागू न करने की. हम आपके गृह सचिव और अन्य अधिकारियों को अगली बार स्क्रीन पर उपस्थित होने के लिए कहेंगे. कम से कम हमारे आदेश के प्रति सम्मान दिखाएं जब हमने किसी मुद्दे को संभाला है."

"गृह सचिव-SP सभी तलब किए जाएंगे", पत्रकार को UAPA में नोटिस भेजने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

उन्होंने आगे कहा, "पुलिस अधीक्षक को सूचित करें कि इस तरह से लोगों को परेशान न करें. किसी को सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? यह उत्पीड़न नहीं तो और क्या है? नहीं तो हमें एसपी को अदालत में बुलाना होगा और उसे जवाबदेह बनाना होगा, अगर हम पाते हैं कि वह लोगों को नोटिस जारी करके अनुपालन से बचने की कोशिश कर रहा है."

शीर्ष अदालत पत्रकार समीउल्लाह शब्बीर खान द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो त्रिपुरा पुलिस द्वारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए (पुलिस अधिकारी के समक्ष पेश होने की सूचना) के तहत पेश होने के लिए जारी नोटिस के खिलाफ थी. खान की ओर से पेश अधिवक्ता शारुख आलम ने तर्क दिया कि शीर्ष अदालत ने 10 जनवरी को एक अंतरिम आदेश पारित किया था जिसमें पुलिस को पत्रकार के ट्वीट के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया गया था.

शीर्ष अदालत ने आज अपने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि इस अदालत द्वारा पारित 10 जनवरी 2022 का आदेश, हालांकि व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है, औपचारिक रूप से पुलिस अधीक्षक को दिया जाना बाकी है."

त्रिपुरा हिंसा की SIT जांच की याचिका : राज्‍य सरकार के हलफनामे पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

"जैसा भी हो, 29 जनवरी, 2022 को सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें आज याचिकाकर्ता की उपस्थिति की आवश्यकता थी.  याचिकाकर्ता को पहले ही इस अदालत के 10 जनवरी 2022 के पिछले आदेश द्वारा संरक्षित किया जा चुका है. आगे के आदेश लंबित रहने तक धारा 41ए के तहत नोटिस के अनुसरण में आगे कोई कदम नहीं उठाया जाएगा."

सुनवाई के अंत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हस्तक्षेप किया और पीठ को आश्वासन दिया कि अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा. मेहता ने कहा, "मैं इस पीठ को विश्वास दिलाता हूं कि इस अदालत के आदेश का पूरी पवित्रता के साथ सम्मान किया जाएगा."

10 जनवरी को शीर्ष अदालत ने त्रिपुरा पुलिस को राज्य में कथित सांप्रदायिक हिंसा के बारे में एक पत्रकार के ट्वीट के संबंध में अपने नोटिस पर कार्रवाई करने से रोक दिया था.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Tripura, Supreme Court, Social Media Post
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com