गांजा से जुड़े मामलों में जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिलचस्प टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में हमारा रुख 'बहुत उदार' रहता है. हालांकि, इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट जाने को कहा.
क्या था मामला?
ये मामला बिस्वनाथ मंडल की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था. आरोपी मंडल पर NDPS का केस दर्ज हुआ है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने उसे अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
दरअसल, बिस्वनाथ मंडल की पत्नी के घर से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ था. हाई कोर्ट ने कहा था कि भले ही छापेमारी के वक्त मंडल मौके पर नहीं था, लेकिन घर का मालिक होने के कारण वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. हाई कोर्ट ने NDPS एक्ट की धारा 37 में जमानत की शर्तों का हवाला दिया था.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंडल के वकील ने दावा किया कि जिस घर से गांजा बरामद हुआ था, वह मंडल का है ही नहीं. इस पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने पूछा- 'वे आपको फंसाना चाहते हैं, क्या?'
कोर्ट ने आगे कहा कि घर किसका है, यहा जांच का विषय है. अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी सरेंडर कर रेगुलर बेल के लिए अप्लाई कर सकता है.
कोर्ट ने कहा कि आप सरेंडर करें और जमानत के लिए आएं. अगर ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होती है तो हमारे पास आइए, हम जमानत दे देंगे.
अग्रिम जमानत याचिका खारिज
मंडल के वकील ने जब सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देकर अग्रिम जमानत की मांग की तो बेंच ने कहा कि वह उस मामले के तथ्यों पर आधारित होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी. बेंच ने साफ किया कि धारा 37 के तहत NDPS मामलों में लागू वैधानिक पाबंदियों को देखते हुए वह इस स्तर पर प्री-अरेस्ट बेल देने के लिए इच्छुक नहीं है.
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