Supreme Court Chambal Sanctuary: नेशनल चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाई. कहा- सख्त टिप्पणी कर कहा- सिर्फ FIR दर्ज करना काफी नहीं, अवैध खनन के “सोर्स” और मास्टरमाइंड तक पहुंचना जरूरी. SC ने हथियारबंद खनन माफिया का मुकाबला करने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार से आदेशों के पालन में ढिलाई पर सवाल किए. एमिकस क्यूरी निखिल गोयल ने कोर्ट को बताया- 2022 से निर्देश मौजूद थे, लेकिन ज्यादातर मंजूरियां पिछली सुनवाई के बाद दी गईं हैं.
हाई मास्ट कैमरे लगाए जाएंगे
कोर्ट को बताया गया कि सेंचुरी में 40 संवेदनशील प्वाइंट चिन्हित किए गए, 625 FIR दर्ज हुईं, फिर भी मुख्य खनन माफिया की पहचान नहीं हो सकी है. इस पर राजस्थान वन सचिव ने कोर्ट को बताया- हाई मास्ट कैमरे लगाए जाएंगे.
MP-UP और राजस्थान मिलकर काम करें
इससे पहले 17 अप्रैल को सुनवाई के दौरान Supreme Court ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सीमा क्षेत्रों में अवैध खनन रोकने के लिए मिलकर काम करें. इसके लिए एक समान SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू करने को कहा गया है ताकि कार्रवाई में कोई ढिलाई न रहे.
खनन माफिया पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश
Supreme Court कोर्ट ने साफ कहा है कि अवैध खनन में शामिल वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए. दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और उनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जाए ताकि इस नेटवर्क को आर्थिक रूप से तोड़ा जा सके. तीनों राज्यों को केंद्रीकृत कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं. ये कंट्रोल रूम रियल टाइम डेटा के आधार पर निगरानी करेंगे और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.
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