भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि हाई कोर्टों में शेष मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर वह और कॉलेजियम के अन्य सदस्य पहले से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लिखे गए पत्रों में उठाई गई चिंताओं का भी संज्ञान लिया गया है
CJI ने स्पष्ट किया कि किसी कार्यरत न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर फैसला स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि आरोपों की सामग्री का सार्वजनिक मंच पर न्यायिक निर्धारण नहीं किया जा सकता और संबंधित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर मिलना जरूरी है
उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आरोप लगाए जाने से वे न्यायाधीश के खिलाफ किसी निष्कर्ष या दोष का प्रमाण नहीं बन जाते. मामले की उचित स्तर पर जांच की जा रही है. इस प्रक्रिया में जस्टिस मेहता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के साथ-साथ जस्टिस शर्मा के जवाब पर भी विचार किया जाएगा.
CJI के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर बने रहने, उनके तबादले या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित निर्णय सक्षम संस्थागत प्राधिकारी द्वारा सभी तथ्यों और सामग्री पर विचार करने के बाद लिया जाएगा.
CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों से संबंधित व्यक्तिगत शिकायतों को मीडिया में एक-दूसरे के दावों और प्रतिदावों के आधार पर तय करने की अनुमति नहीं दे सकता. उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
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