- सुप्रीम कोर्ट ने आधार के इस्तेमाल को लेकर केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है
- याचिका में आधार को सिर्फ पहचान पत्र के तौर पर यूज करने और अन्य प्रमाणों के रूप में रोकने की मांग की गई है
- याचिकाकर्ता ने आधार के जन्मतिथि, निवास और नागरिकता प्रमाण के रूप में यूज को कानूनी सीमा से बाहर बताया
सुप्रीम कोर्ट ने आधार के उपयोग को लेकर केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. आधार को केवल पहचान पत्र के तौर पर इस्तेमाल करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. दरअसल याचिका में मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सर्फ पहचान पत्र के रूप में किया जाए, न कि नागरिकता, निवास (डोमिसाइल), पते या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में.
आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि आधार का उपयोग उसकी कानूनी सीमा से आगे बढ़कर विभिन्न प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं में किया जा रहा है. उनकी मांग है कि केंद्र, राज्य सरकारें और चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करें कि आधार केवल पहचान साबित करने के लिए इस्तेमाल हो, न कि नागरिकता के प्रमाण के रूप में, निवास/डोमिसाइल के प्रमाण के रूप में, पते के प्रमाण के रूप में, जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में. उन्होंने नए मतदाता पंजीकरण के फार्म -6 में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने पर भी आपत्ति जताई.
अवैध प्रवासियों को आसानी से मिल रहा आधार कार्ड
याचिका के मुताबिक, यह व्यवस्था आधार एक्ट, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 14के विपरीत है, इसलिए इसे अवैध और अप्रभावी घोषित किया जाना चाहिए. साथ ही ये भी दावा किया गया है कि आधार पंजीकरण की प्रक्रिया में कमजोर सत्यापन की वजह से ही घुसपैठिए और अवैध प्रवासी आधार कार्ड प्राप्त कर लेते हैं.
घुसपैठिए ले रहे आधार कार्ड का फैयदा
इसके बाद वे आधार को आधारभूत दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल कर राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, डोमिसाइल प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और अंततः मतदाता पहचान पत्र भी हासिल कर लेते हैं. इससे ऐसे लोग केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण और अन्य लाभों का फायदा उठा सकते हैं, जो वास्तविक पात्र नागरिकों के लिए निर्धारित हैं.
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