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PM मोदी ने अजमेर शरीफ भेजी थी चादर, आपत्ति वाली याचिका खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा? 

इस फैसले का नेशनल ओलमा पार्लियामेंट के चीफ, मौलाना डॉ कल्बे रुशेद रिजवी ने स्वागत किया. उन्होंने कहा कि चादर भेजना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है.

PM मोदी ने अजमेर शरीफ भेजी थी चादर, आपत्ति वाली याचिका खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा? 

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री द्वारा अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाना एक न्यायसंगत मामला नहीं है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस वर्ष चादर चढ़ा दी गई है, यह मामला अब अप्रासंगिक हो गया है. यह कोई ऐसा विषय नहीं जिसे न्यायालय निर्णय दे सके. प्रधानमंत्री द्वारा अजमेर दरगाह को चादर अर्पित करने की यह परंपरा भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू से शुरू होकर उनके बाद के सभी प्रधानमंत्रियों द्वारा भी निभाई गई है.

राष्ट्रीय उलेमा संसद के प्रमुख की सराहना

इस फैसले का नेशनल ओलमा पार्लियामेंट के चीफ, मौलाना डॉ कल्बे रुशेद रिजवी ने स्वागत किया. उन्होंने कहा कि चादर भेजना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है. उनका कहना है कि इस कदम से नफरत की ताकतें कमजोर होती हैं, और सामाजिक समरसता का संदेश जाता है. मौलाना रिजवी ने आगे जोड़ा कि इस परंपरा को आगे बढ़ाना त्याग और सहिष्णुता का प्रतीक है, जो भारतीय समाज के खूबसूरत सद्-विचार को दिखाता है. उनके अनुसार, 'चादर अर्पित करने से न केवल धार्मिक सद्भाव बना रहता है, बल्कि जनता की भावनाएं भी संभली रहती हैं. ऐसे आयोजनों में सभी धर्मों के लोग खुशियां बांटते हैं और यह देश की एकता का मजबूत उदाहरण बनता है.

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अजमेर दरगाह, सूफी बोर्ड और सर्व धर्म ख्वाजा मंदिर ने क्‍या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही अपील खारिज की, उसके बाद से एकता में विश्वास रखने वालों के चेहरे पर खुशी की लहर है. अजमेर दरगाह के खादिम ग़फ़्फ़ार हुसैन फ़रीदी ने कहा कि ग़रीब नवाज की दरगाह पर आज तक हर राजा चाहे राजपूत, मराठा, मुगल, अंग्रेज हों, हर किसी राजनीतिक पार्टी हर प्रधान मंत्री ने हर सेना अध्यक्ष ने बड़ी ही आस्था से प्रेम से चादर पेश की हैं और ग़रीब नवाज का सम्मान किया है..सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला दे कर उस तहजीब को आस्था को हमेशा के लिए जिंदा रखा है. हम सुप्रीम कोर्ट का शुक्रगुजार हैं. 

वहीं सर्व धर्म ख्वाजा मंदिर के अध्यक्ष सुफी राज जैन कहते हैं कि ग़रीब नवाज के दरबार पर 814 साल से जो आस्था की चादर पेश होती रही हैं. यह हमारे भारत की गंगा जमुनी विरासत का हिस्सा है और आज सुप्रीम कोर्ट ने उस आस्था को सर्वोपरि  रखते हुए जो फैसला लिया है हम उसका स्वागत करते हैं. हमारा देश आस्था का देश है. 

वहीं सूफी इस्लामिक बोर्ड के अध्यक्ष मंसूर खान कहते हैं कि अस्थाओं की जीत हमेशा होती है और गरीब नवाज के दरबार में हर कोई अस्थाएं रखता है और हमेशा से उस अस्थाएं के आधार पर ही चादर पेश होती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज भारत की उस विरासत को जिंदा रखा है. सूफी इस्लामिक बोर्ड इसका स्वागत करता है. अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीं सलमान चिश्ती कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाने की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. न्याय का सम्मान करते हुए, माननीय सर्वोच्च न्यायालय को धन्यवाद, जिन्होंने इस तरह की बेतुकी बात को खारिज कर दिया.

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क्या है ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह का इतिहास?

अजमेर दरगाह के इतिहास के बारे में बात करें, तो यह दरगाह 13वीं शताब्दी में बनाया गया था और यह सूफी संत मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है. यह दरगाह भारत के सबसे प्रसिद्ध दरगाहों में से एक है और यहां हर साल लाखों लोग आते हैं. अजमेर दरगाह की विशेषता यह है कि यह एक ऐसा स्थान है जहां सभी धर्मों के लोग आते हैं और अपनी प्रार्थनाएं करते हैं. यह दरगाह सूफी संत मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जिन्होंने भारत में सूफीवाद का प्रचार किया था. 

सूफी संत मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1141 ईस्वी में ईरान में हुआ था और उन्होंने अपना जीवन भारत में बिताया था. उन्होंने अजमेर में अपना निवास स्थान बनाया था और यहां पर उन्होंने लोगों को सूफीवाद की शिक्षा दी थी. इसी दरगाह में उनकी कब्र भी है. अजमेर दरगाह में हर साल उर्स का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों लोग आते हैं. उर्स के दौरान, दरगाह को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया जाता है और लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं. सूफी संत मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती की शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं. उन्होंने लोगों को प्रेम, एकता और शांति का संदेश दिया था. 

गरीब नवाज क्यों कहलाए मोइनुद्दीन चिश्ती?

सूफी संत मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती को गरीब नवाज कहा जाता है क्योंकि वे गरीबों और असहाय लोगों के प्रति बहुत दयालु थे.उन्होंने अपना जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था और उनकी हर संभव मदद करने की कोशिश करते थे. गरीब नवाज का अर्थ है गरीबों का पालन करने वाला. यह नाम उन्हें इसलिए दिया गया है क्योंकि वे गरीबों के प्रति बहुत सहानुभूति रखते थे और उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे.

मोहम्मद मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह गरीबों और असहाय लोगों के लिए एक आश्रय स्थल है, जहां वे अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते हैं. यहां फिल्मी सितारों से लेकर देश विदेश की मशहूर हस्तियां दुआएं मांगने आती है और चादर चढ़ाती है.

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