सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में गाइडलाइन जारी कर सकता है
- कोर्ट ऐसे मामलों में जवाबदेही भी तय करेगा
- ये चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का आखिरी कार्य दिवस है
नई दिल्ली:
हिंसक भीड़ द्वारा सरकारी/निजी संपत्ति का नुकसान करने पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना अहम फैसला सुना सकता है. सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में गाइडलाइन जारी कर सकता है और जवाबदेही भी तय करेगा. ये चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का आखिरी कार्य दिवस है. आपको बता दें कि इस साल सावन में कुछ कांवड़ियों ने ऐसा उत्पात और तांडव मचाया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर बात है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि इलाहाबाद में नेशनल हाईवे के एक हिस्से को कावंडियों ने बंद कर दिया. सख्त लहजे में जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऐसा कांवड़ियों के लिए कहा कि आप अपने घर को जलाकर हीरो बन सकते हैं लेकिन तीसरे पक्ष की संपत्ति नहीं जला सकते.
आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में कोडूंगलौर फिल्म सोसाइटी ने याचिका दाखिल कर कहा था कि जिस तरह से फिल्मों को लोगों व संगठनों द्वारा बैन करने के नाम पर व अन्य धरना प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ की जाती है उसे रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए. याचिका में कहा गया था कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा था कि किसी प्रदर्शन आदि में कोई लाठी डंडा या हथियार नहीं ले जाया जा सकता. इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं हो रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट है 'सुप्रीम'
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से AG केके वेणुगोपाल ने इसे मंजूर किया और कहा कि देश हर हफ्ते पढ़े लिखे लोगों द्वारा दंगे देख रहे हैं. हमने वीडियो में कावड़ियों को कार को पलटते हुए देखा, क्या कारवाई हुई. इतना ही नहीं पद्मावत फिल्म को लेकर हंगामा किया गया. फिल्म की हिरोइन की नाक काटने की धमकी दे दी गई. हमें जिम्मेदारी तय करनी होगी.
VIDEO: समानांतर खड़े होते असहमति के स्वर
आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में कोडूंगलौर फिल्म सोसाइटी ने याचिका दाखिल कर कहा था कि जिस तरह से फिल्मों को लोगों व संगठनों द्वारा बैन करने के नाम पर व अन्य धरना प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ की जाती है उसे रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए. याचिका में कहा गया था कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा था कि किसी प्रदर्शन आदि में कोई लाठी डंडा या हथियार नहीं ले जाया जा सकता. इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं हो रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट है 'सुप्रीम'
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से AG केके वेणुगोपाल ने इसे मंजूर किया और कहा कि देश हर हफ्ते पढ़े लिखे लोगों द्वारा दंगे देख रहे हैं. हमने वीडियो में कावड़ियों को कार को पलटते हुए देखा, क्या कारवाई हुई. इतना ही नहीं पद्मावत फिल्म को लेकर हंगामा किया गया. फिल्म की हिरोइन की नाक काटने की धमकी दे दी गई. हमें जिम्मेदारी तय करनी होगी.
VIDEO: समानांतर खड़े होते असहमति के स्वर
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