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This Article is From Apr 21, 2025

कोरोना के टीके से 'दिव्यांग' हुए व्यक्ति को 'सुप्रीम' सलाह, हर्जाने के लिए दायर करें मुकदमा

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह अगर आप हर्जाने के लिए मुकदमा करेंगे तो आपको कुछ राहत मिल सकती है. याचिकाकर्ता का दावा है कि कोरोना के टीके की पहली डोज लेने से उसके पैरों ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया है.

कोरोना के टीके से 'दिव्यांग' हुए व्यक्ति को 'सुप्रीम' सलाह, हर्जाने के लिए दायर करें मुकदमा
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर कोविड-19 टीके की पहली खुराक के दुष्प्रभावों के कारण दिव्यांगता का सामना करने वाले एक याचिकाकर्ता से कहा है कि वह अपनी याचिका को आगे बढ़ाने के बजाय हर्जाने के लिए मुकदमा दायर करे.याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से एक हफ्ते का समय मांगा. इस पर अदालत ने इस मामले को एक हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध किया है. इस मामले में याचिकाकर्ता की मांग है कि केंद्र सरकार और कोविशील्ड टीका बनाने वाली कंपनी यह सुनिश्चित करें कि याचिकाकर्ता शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति के रूप में सम्मान के साथ रह सके.

देश की शीर्ष अदालत ने क्या कहा है 

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कोविड-19 टीकाकरण के विशेष संदर्भ में टीकाकरण के बाद होने वाले दुष्प्रभावों (एईएफआई) के प्रभावी समाधान के लिए उचित दिशा-निर्देश निर्धारित करने के निर्देश देने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.

पीठ ने कहा,"अगर आप अपनी याचिका यहीं लंबित रखेंगे तो दस साल तक कुछ नहीं होगा. यदि आप कम से कम मुकदमा दायर करेंगे तो आपको कुछ त्वरित राहत मिलेगी." इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि व्यक्ति कोविड टीके की पहली खुराक लेने के बाद उसके प्रतिकूल प्रभावों से पीड़ित है, क्योंकि उसके पैरों में 100 प्रतिशत दिव्यांगता हो गई है.

न्यायमूर्ति गवई ने कहा,"इसके लिए रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है? क्षतिपूर्ति के लिए मुकदमा दायर करें." इस पर वकील ने कहा कि समान मुद्दे को उठाने वाली दो अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और समन्वय पीठों ने उन पर नोटिस जारी किए हैं.

अदालत ने क्या दलील दी है

अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो उसकी याचिका को लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाएगा. पीठ ने कहा कि यह याचिका लंबे समय तक शीर्ष अदालत में लंबित रह सकती है और 10 साल तक इस पर सुनवाई नहीं हो सकती.

वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें अपने मुवक्किल के साथ इस पर चर्चा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाए.
पीठ ने कहा,"यदि कम से कम मुकदमा दायर किया जाता है, तो एक साल, दो साल या तीन साल के भीतर आपको कुछ राहत मिलेगी." इसके बाद मामले को एक हफ्ते के बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया.

याचिका में केंद्र और कोविशील्ड टीके के निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सुनिश्चित करें कि याचिकाकर्ता शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति के रूप में सम्मान के साथ रह सके.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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