- SC ने सौरव गांगुली के पक्ष में दिए गए 14.49 करोड़ के आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की.
- विवाद वर्ष 2003 के Player Representation Agreement से जुड़ा था.
- Percept का दावा था कि गांगुली की केकेआर से आय दोनों पक्षों के Revenue Sharing Agreement के अंतर्गत आती है.
सौरव गांगुली के पक्ष में दिए गए 14.49 करोड़ रुपये के आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने वाली Percept Talent Management की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए गांगुली को राहत बरकरार रखी.
यह विवाद वर्ष 2003 में हुए Player Representation Agreement से जुड़ा था, जिसके तहत Percept को गांगुली के व्यावसायिक और प्रचार संबंधी अधिकारों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. कंपनी का दावा था कि KKR से गांगुली को हुई आय को भी दोनों पक्षों के Revenue Sharing Agreement के दायरे में माना जाना चाहिए.
Percept की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान ने दलील दी कि समझौते की शर्तें व्यापक थीं और आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने अनुबंध की सही व्याख्या नहीं की. हालांकि, सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी का फ्रेंचाइजी टीम से पेशेवर तौर पर जुड़ना और प्रचार गतिविधियों में हिस्सा लेना अलग-अलग पहलू हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल और कलकत्ता हाईकोर्ट दोनों के निष्कर्ष समान हैं, इसलिए उनमें दखल देने का कोई आधार नहीं बनता. इससे पहले आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने गांगुली के पक्ष में 14.49 करोड़ रुपये, उस पर 12 प्रतिशत ब्याज और 50 लाख रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया था.
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