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मैथ्स में 51 नंबर, ISRO की जॉब छोड़ी, भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट लॉन्च करने चले IIT पास पवन कुमार चंदना की कामयाबी की कहानी

भारत आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में आज छोटे कदम के साथ बड़ी छलांग लगाएगा. स्काईरूट एयरोस्पेस का प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 आज लॉन्च होगा. स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना की सफलता की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.

मैथ्स में 51 नंबर, ISRO की जॉब छोड़ी, भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट लॉन्च करने चले IIT पास पवन कुमार चंदना की कामयाबी की कहानी
Skyroot Aerospace CEO Pawan Kumar Chandana
NDTV
नई दिल्ली:

भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम 1 आज सुबह 11:30 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा. श्रीहरिकोटा में स्काईरूट के विक्रम 1 रॉकेट का काउंटडाउन शुरू हो गया है. श्रीहरिकोटा में विक्रम 1 की लॉन्चिंग भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में नई छलांग होगी. भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के मालिक और सीईओ पवन कुमार चंदना हैं. उन्होंने अपने दोस्त नागा भरत डाका के साथ इस कंपनी की शुरुआत की थी, जो कंपनी के सीओओ हैं. उन्हें लोग भारत का एलन मस्क भी कहने लगे हैं. विक्रम 1 का मिशन प्राइवेट रॉकेट लॉन्च और उसकी क्लियरेंस की बड़ी शुरुआत होगी.

अंतरिक्ष में बड़ी छलांग

अंतरिक्ष में ये रॉकेट करीब 16 मिनट तक रहेगा. विक्रम 1 की ऊंचाई 22 मीटर और व्यास 1.7 मीटर है. भले ही स्पेस एक्स, ब्लू ओरिजन जैसी दुनिया की दिग्गज निजी अंतरिक्ष कंपनियों के बीच यह भारत की पहली उड़ान है, लेकिन रक्षा क्षेत्र के बाद अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्राइवेट रॉकेट का आगाज बड़ा कदम माना जा रहा है. यह ऑर्बिटल फ्लाइट की कोशिश करने वाले सभी भारतीय रॉकेटों में सबसे छोटा है.भारतीय प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के लिए ये एक शानदार शुरुआत होगी. 

मैथ्स के साधारण छात्र से IIT से इंजीनियरिंग तक

हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 1991 में जन्मे पवन कुमार चंदना स्कूली दिनों में सामान्य छात्र थे. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि मैथ्स में उनके सिर्फ 51 नंबर आए थे. लेकिन एडवांस मशीनों और टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी ने उनकी जिंदगी बदल दी.चंदना ने साल 2007 में IIT एग्जाम पास किया और IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और थर्मल इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री 2012 में ली. 

ISRO के वैज्ञानिक से प्राइवेट कंपनी तक

IIT पास करने के बाद चंदना 2012 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र तिरुवनंतपुरम में वैज्ञानिक बने. उन्होंने ISRO के सबसे भारी रॉकेट GSLV Mk-III (चंद्रयान मिशन में इस्तेमाल) पर काम किया. वो भारी रॉकेट (GSLV Mk-II) के S200 सॉलिड बूस्टर के सिस्टम इंजीनियर रहे.उन्होंने इसरो के स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मिशन में बतौर डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर काम किया. चांदना को उनके शानदार काम के लिए 2016 में ISRO में दो इनोवेशन अवॉर्ड्स दिए गए. 

स्काईरूट एयरोस्पेस कैसे बनी

इसरो में काम करने के दौरान पवन और उनके दोस्त नागा भरत डाका को अहसास हुआ कि दुनिया भर में छोटे सैटेलाइट की मांग तेजी से उछाल मार रही है. स्पेस लॉन्च के लिए ऑन डिमांड रॉकेट की दरकार है. लिहाजा दोनों ने सरकारी नौकरी छोड़कर जून 2018 में हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस की नींव रखी. उनका मिशन है कि अंतरिक्ष तक पहुंच को इतना आसान बनाया जाए, जितना कोई कैब बुक करना होता है.

विक्रम-S (Vikram-S) की कामयाबी

स्काईरूट ने 18 नवंबर 2022 को भारत का पहला निजी सब ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-S सफलतापूर्वक लॉन्च किया. स्काईरूट अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने वाली देश की पहली प्राइवेट कंपनी बन गई.विक्रम-1 कंपनी का पहला बड़ा ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है. इसे पूरी तरह से कार्बन बॉडी और 3D प्रिंटेड इंजनों के जरिये देश में ही बनाया गया है. यह छोटे सैटेलाइट को धरती की निचली कक्षा में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है.

भारत की पहली स्पेस स्टार्टअप यूनिकॉर्न

दुनिया की दिग्गज कंपनियों ब्लैकरॉक, टेमासेक और GIC का ध्यान भी स्काईरूट ने खींचा.बड़ी कंपनियों की फंडिंग के साथ स्काईरूट भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक वैल्यू) वाली कंपनी बन गई. 

फोर्ब्स लिस्ट में चंदना, बड़े सम्मान मिले

पवन कुमार चंदना को फोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया (Forbes 30 Under 30 Asia 2020) लिस्ट में जगह मिली थी. चंदना की स्पेस कंपनी को भारत सरकार ने नेशनल स्टार्टअप अवार्ड से सम्मानित किया गया. वर्ष 2018 में उन्हें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिवीजन पुरस्कार मिला. पवन कुमार चंदना ने अक्टूबर 2019 में निरुपमा तुंगला से शादी की. 

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