- महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी के सांसदों के बागी होने की चर्चा
- ऑपरेशन टाइगर पर संजय राउत ने कहा- बेईमानों का क्या कर सकते हैं
- उद्धव ठाकरे के सांसदों को बड़े ऑफर का किया जा रहा है दावा
क्या शिवसेना उद्धव गुट को ही पार्टी में बगावत की आशंका है? एनडीटीवी से पार्टी नेता संजय राउत ने जो कहा है कि उससे ये सवाल उठ रहा है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वही पुरानी पटकथा, वैसी ही सुगबुगाहट और उसी तरह की बेचैनी तैरने लगी है, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी की सरकार को उखाड़ फेंका था. क्या शिवसेना (UBT) यानी उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 7 सांसद बागी होने की राह पर हैं? दिल्ली से लेकर मुंबई के मातोश्री तक इस समय फोन की घंटियां घनघना रही हैं. दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का भाजपा नेतृत्व सीधे उद्धव सांसदों के संपर्क में है. सूत्र बताते हैं कि सांसदों को कोई बड़ा “ऑफर” दिया गया है और महिला आरक्षण, परिसीमन के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की जोरदार तैयारी में है!
शिवसेना उद्धव को भी लग रहा है डर!
कैमरे पर “ऑल इस वेल” बोल रहे उद्धव के नेता संजय राउत ने ही गुट में टूट का इशारा अपने एक पोस्ट से कर दिया. सोमवार रात संजय राउत ने खुद अपने एक सोशल मीडिया X पोस्ट से इस डर को हवा दे दी, लिखा, "त्रिपुरा में नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शिव कुंडू से मिलिए. मानिए या न मानिए, तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसद आधिकारिक तौर पर उनकी पार्टी में “विलय” हो गए! ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र के दल बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी “कुंडू” को ढूंढना पड़ेगा! आखिरकार, संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून) तो यही कहती है!"
हास्य जत्रा:
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 15, 2026
हे महाशय आहेत शिऊ कुंडू
नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी चे संस्थापक अध्यक्ष,(त्रिपुरा)
यांच्याच “पार्टी "त तृणमूलच्या २२ खासदारांनी स्वतःला विलीन करून घेतले!
महाराष्ट्रातील फुटीरांना देखील अशाच एका कुंडू चा शोध घ्यावा लागेल!
घटनेतील १० वे अनुच्छेद तेच सांगतेय!
जय हो ! pic.twitter.com/IntLHHpsOK
उद्धव की पार्टी में भी टीएमसी वाली पटकथा?
अगर ये सिर्फ़ TMC की टूट पर प्रतिक्रिया थी तो महाराष्ट्र के दल-बदलुओं की याद अचानक क्यों आई, वो भी उस समय में जब उन्हीं की पार्टी में टूट की बड़ी चर्चा है? साफ मतलब था, उद्धव गुट के भीतर बगावत की खिचड़ी पक रही है और अगर बागी सांसदों को दलबदल कानून से बचना है, तो उन्हें टीएमसी के बागियों की तरह किसी अनजान या छोटी पार्टी में अपना विलय करना पड़ेगा. यानी जो बगावत ममता बनर्जी की टीएमसी में देखी गई थी, क्या वैसी ही पटकथा अब उद्धव ठाकरे के साथ लिखी जा रही है?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने लोकसभा सांसदों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में 9 में से सिर्फ 4 सांसद व्यक्तिगत रूप से पहुंचे.
ये सांसद व्यक्तिगत रूप से पहुंचे
1. अरविंद सावंत
2. अनिल देसाई
3. संजय दीना पाटिल
4. राजाभाऊ वाजे (नासिक)
बाकी के 5 सांसद मीटिंग से नदारद रहे, दावा हुआ, ऑनलाइन जुड़े!
1. संजय जाधव (परभणी)
2. संजय देशमुख (वाशिम)
3. ओमराजे निंबाळकर (धाराशिव)
4. भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
5. नागेश पाटील आष्टीकर (हिंगोली)
5 सांसद करेंगे खेल?
दिलचस्प बात यह है कि ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी उन्हें बधाई देने नहीं पहुंचे थे. हालांकि, पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि ये सांसद ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग के दौरान उद्धव ठाकरे की सिर्फ नागेश पाटील आष्टीकर से ही बात हो पाई. कार्यकर्ताओं में भ्रम न फैले, इसलिए उद्धव ठाकरे ने अनुपस्थित सांसदों से दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.
संजय देशमुख ने दिखा दिए तेवर?
इस आग में घी डालने का काम किया उद्धव के सांसद संजय देशमुख ने. “मातोश्री” की बैठक से गायब रहने के ठीक दूसरे दिन वे शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए. इस पर सफाई देते हुए उद्धव नेता अनिल देसाई ने कहा, “संजय देशमुख के घर पर बेटी को देखने के लिए लोग आने वाले थे, उन्होंने स्पष्टीकरण दिया है कि वे किसी काम के सिलसिले में मिले थे. लेकिन अलग गुट बनाना या किसी के साथ जाने की बात में कोई तथ्य नहीं है। मीडिया में साल भर से 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा है, लेकिन न टाइगर दिखता है और न ऑपरेशन."
शिवसेना शिंदे गुट बोला- ये UBT का अंदरूनी मामला
दूसरी तरफ, नागपुर से महायुति के विधायक, महाराष्ट्र सरकार में शिंदे गुट मंत्री आशीष जयस्वाल ने “ऑपरेशन टाइगर” पर कहा, "यह UBT का अंदरूनी मामला है. अगर उनकी पार्टी के लोग नाराज हैं और छोड़ कर जा रहे हैं, तो यह उनका विषय है, हम ऐसा कोई उठाव नहीं करवा रहे हैं. और वैसे भी, ऐसी चीजें बगावत, पहले से बताकर नहीं की जातीं." बगावत की सुरों का खुद इशारा करने वाले संजय राउत ने दिल्ली में पत्रकारों के सामने फिर “ऑल इस वेल” दोहराया! लेकिन सवालों की बौछार में फिर इशारा दे गए, राउत ने कहा, "सांसदों ने अपनी आई (मां), बच्चों की शपथ ली है। किसी ने साईं बाबा की तो किसी ने मां तुळजा भवानी की शपथ ली है कि वे पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. हमारी पार्टी के सभी 9 सांसद एकजुट हैं. अमित शाह, मोदी और फडणवीस की पार्टी में कोई विश्वसनीयता नहीं बची है, वे पैसे देकर पार्टी फोड़ रहे हैं."उद्धव ठाकरे के जितना कार्यकर्ताओं से मिलने वाला कोई नेता नहीं है. शरद पवार के बाद वे ही सबसे ज्यादा लोगों से मिलते हैं. मोदी का खौफ सिर्फ ईडी का खौफ है."
लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि संजय राहुत ने एनडीटीवी से खास बातचीत में ये भी कह दिया कि-लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी.
#NDTVExclusive | "Who is the person who has made these claims? I have never seen him, he will now dictate these?" : Senior Shiv Sena (UBT) leader and MP Sanjay Raut (@rautsanjay61) speaks to NDTV's @aishvaryjain on 'Operation Tiger' buzz pic.twitter.com/x33LIvQDWc
— NDTV (@ndtv) June 16, 2026
राजाभाऊ वाजे के बयान से बढ़ी हलचल
संजय राउत भले ही दिल्ली में बैठकर ऑल इज़ वेल का राग अलाप रहे हों, लेकिन नासिक से यूबीटी सांसद राजाभाऊ वाजे के एक ताजा बयान ने 19 जून को होने वाले शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर बड़ी हलचल का इशारा दे दिया है. 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस कार्यक्रम है, जहां उद्धव ठाकरे को अपना शक्ति प्रदर्शन करना है. लेकिन उद्धव के सांसद राजाभाऊ वाजे ने कहा, “मुंबई में 19 तारीख के शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मैं शामिल हो पाऊंगा या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता. 19 तारीख को मैं दिल्ली से लौट रहा हूं, और मेरे निर्वाचन क्षेत्र में भी कुछ कार्यक्रम हैं. उसके बाद अगर समय मिला, तो मुंबई जाने को लेकर फैसला लूंगा.
उद्धव को लगेगा सबसे बड़ा झटका!
मराठी मानुस और बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाली इस पार्टी के टूटने का इतिहास पुराना है, लेकिन उद्धव ठाकरे के दौर में यह सबसे घातक साबित हुआ है। अगर यह 7 सांसदों वाली बगावत सच साबित होती है, तो यह पार्टी को फिर से खड़ा ना कर पाने वाली टूट साबित हो सकती है!
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