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'शिवसेना उद्धव कांग्रेस में विलय की ओर...': स्पीकर को सौंपे गए पत्र में बागी सांसदों ने बताई बगावत की वजह

उम्मीद है कि ये छह सांसद 20 जून को एकनाथ शिंदे से मिलेंगे. उस बैठक के बाद, वे स्पीकर के साथ हुई बातचीत और शिवसेना उद्धव (UBT) छोड़ने के कारणों का ब्योरा देने वाले दस्तावेज सार्वजनिक कर सकते हैं.

'शिवसेना उद्धव कांग्रेस में विलय की ओर...': स्पीकर को सौंपे गए पत्र में बागी सांसदों ने बताई बगावत की वजह
उद्धव ठाकरे इंडिया गठबंधन का अभी हिस्सा हैं और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के साथ मिलकर गठबंधन में शामिल हैं. (फाइल पिक्चर)
  • उद्धव ठाकरे गुट ने संसदीय बैठक में शामिल नहीं होने वाले छह बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है
  • छह बागी सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना गुट में शामिल होने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने लगे हैं
  • बागियों का दावा है कि संसदीय दल के दो-तिहाई से अधिक शिंदे गुट में हैं, तो दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता

शिवसेना उद्धव के अंदर राजनीतिक लड़ाई तब और तेज हो गई जब उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी की संसदीय बैठक में शामिल नहीं होने वाले छह बागी लोकसभा सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया. वहीं दूसरी ओर, बागी नेताओं ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में अपने गुट के विलय की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देना शुरू कर दिया है. संसदीय दल की इस बैठक को उद्धव गुट ने बहुत अहम बताया था, लेकिन इसमें सिर्फ चार सांसद ही शामिल हुए. बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ-साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे. छह लोकसभा सांसदों के बैठक में नहीं आने के कारण अब पार्टी के भीतर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है.

सूत्रों ने NDTV को बताया कि बैठक में इन सभी छह सांसदों को सात दिन का 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने और उनके अनुपस्थित रहने का कारण पूछने का फैसला किया गया. पार्टी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी औपचारिक रूप से सूचित करने की तैयारी कर रही है कि बागी सांसदों की गतिविधियां पार्टी-विरोधी हैं. 

क्या जाएगी सदस्यता?

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद नेताओं ने बागी नेताओं के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक विकल्पों पर चर्चा की. हालांकि, कानूनी जानकारों का कहना है कि संसदीय दल की आंतरिक बैठक में शामिल होना दलबदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आता है. दसवीं अनुसूची के तहत, व्हिप केवल सदन की कार्यवाही के दौरान ही लागू होता है, ना कि पार्टी की आंतरिक बैठकों के लिए. हालांकि पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है, लेकिन अयोग्यता अपने आप नहीं होती.

ये घटनाक्रम एक असाधारण राजनीतिक गतिरोध के बीच सामने आए हैं, जो पिछले तीन दिनों से काफी हद तक बंद दरवाजों के पीछे चल रहा है.

लोकसभा स्पीकर से सीट बदलने की मांग

सूत्रों के मुताबिक, सभी छह बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की है और एक पत्र सौंपा है. इस पत्र में कहा गया है कि शिवसेना उद्धव (UBT) बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भटक गई है. खबरों के अनुसार, सांसदों ने स्पीकर को बताया कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो रहे हैं और अनुरोध किया कि लोकसभा में उनके बैठने की व्यवस्था उसी के अनुसार बदल दी जाए.

बागियों ने चुनाव आयोग को भी अपनी स्थिति से अवगत कराया है. उनका दावा है कि संसदीय दल के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं. इसी आधार पर उनका तर्क है कि उन पर दलबदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू नहीं होते हैं.

कांग्रेस में शिवसेना उद्धव के विलय की जताई आशंका

स्पीकर को सौंपे गए पत्र की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने इस बात की आशंका जताई है कि शिवसेना उद्धव (UBT) भविष्य में कांग्रेस के साथ विलय की ओर बढ़ सकती है. बताया जा रहा है कि पत्र में यह तर्क दिया गया है कि मौजूदा नेतृत्व के तहत पार्टी की वैचारिक दिशा अब बालासाहेब ठाकरे के विजन को नहीं दर्शाती है. सूत्रों ने बताया कि बागी सांसदों ने औपचारिक रूप से अलग होने से पहले एक प्रस्ताव पारित किया. कथित तौर पर इस प्रस्ताव में कहा गया है कि शिवसेना का गठन कभी भी कांग्रेस इकोसिस्टम का हिस्सा बनने के लिए नहीं किया गया था, और इसमें दोनों पार्टियों के बीच बढ़ती वैचारिक निकटता पर चिंता जताई गई है.

एकनाथ शिंदे का फुल सपोर्ट

छह सांसदों का कहना है कि उन्होंने कोई अलग गुट नहीं बनाया है, बल्कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त शिवसेना में शामिल हो गए हैं. सूत्रों ने इस ऑपरेशन के आखिरी चरण की जानकारी भी दी है. बुधवार रात, एकनाथ शिंदे ने इन छह सांसदों के साथ करीब आधे घंटे तक बातचीत की. खबरों के मुताबिक, शिंदे गुट के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है और सांसदों को पूरा राजनीतिक समर्थन देने का भरोसा दिलाया. बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट को यह संदेश दिया गया कि "कोई कहीं नहीं गया है. हम सब साथ हैं." शिंदे ने सांसदों को यह भरोसा भी दिलाया कि आगे होने वाली राजनीतिक और कानूनी लड़ाई में वह मजबूती से उनके साथ खड़े रहेंगे.

शिंदे गुट के सूत्रों का कहना है कि छह में से किसी भी सांसद के उद्धव ठाकरे गुट की बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद नहीं थी और यह गुट पूरे दिन पार्टी नेतृत्व के संपर्क में रहा.

दोनों गुटों में बढ़ी टकराव की आशंका

इस राजनीतिक टकराव से सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं पैदा हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना उद्धव (UBT) नेताओं की ओर से छह बागी सांसदों के खिलाफ विवादास्पद बयान दिए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र पुलिस को उनकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है. सूत्रों ने बताया कि सांसदों के आवासों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने की उम्मीद है और इन नेताओं के लिए सुरक्षा घेरा बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई है.

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि बागी सांसदों को पार्टी की ओर से जारी नोटिस का जवाब देना होगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि बैठक के दौरान हो रही गतिविधियों की जानकारी टेलीफोन पर उद्धव ठाकरे को दी जा रही थी.

उम्मीद है कि ये छह सांसद 20 जून को एकनाथ शिंदे से मिलेंगे. उस बैठक के बाद, वे स्पीकर के साथ हुई बातचीत और शिवसेना उद्धव (UBT) छोड़ने के कारणों का ब्योरा देने वाले दस्तावेज सार्वजनिक कर सकते हैं. इससे शिवसेना के दोनों विरोधी गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी टकराव का एक नया दौर शुरू हो सकता है.

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ऐश्वर्या जैन
विशेष संवाददाता
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