- शरद पवार ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर महाराष्ट्र की राजनीति में उनके रुख को लेकर कयास बढ़ा दिए हैं
- देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा किसानों की कर्जमाफी में दो शर्तें हटाने पर शरद पवार ने तारीफ की है
- महाविकास अघाड़ी में टकराव तेज होने के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने बदलाव की संभावना जताई है
शरद पवार का रुख आखिर क्या किधर होगा? महाराष्ट्र की राजनीति में यह यक्ष प्रश्न इन दिनों हर कोई पूछ रहा है. वजह यह है कि एक दिन शरद पवार ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से उनके दफ्तर में जाकर मुलाकात कर ली. फिर देवेंद्र फडणवीस सरकार ने किसानों की कर्जमाफी के फैसले में दो शर्तें हटा दीं तो उसकी तारीफ कर दी. इन दो वजहों से लगातार कयास लग रहे हैं क्या शरद पवार की पार्टी आने वाले दिनों में रुख बदलकर एनडीए के पाले में जा सकती है. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि भाजपा की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है कि संसद में उसका समर्थन बढ़ जाए. मॉनसून सेशन से पहले टीएमसी, उद्धव ठाकरे खेमे के सांसदों ने एनडीए का दामन थामा है.
ऐसे में शरद पवार के बदले मिजाज को भी भांपने की कोशिश हो रही है. भले ही शरद पवार का अगला कदम क्या होगा, यह किसी को पता नहीं हैं. लेकिन महाविकास अघाड़ी में टकराव जरूर तेज हो गया है. संजय राउत ने इस पर सवाल उठाए तो कांग्रेस के सीनियर लीडर पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ कहा कि कुछ होने वाला है. एकनाथ शिंदे से मीटिंग पर उनका कहना था कि यह सब अचानक नहीं हुआ है. महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा लगता है कि कुछ चर रहा है. वहीं इस बारे में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से सवाल हुआ तो उन्होंने इसे प्याली में उठा तूफान बताया है. इस पर भी पृथ्वीराज चव्हाण का कहना था कि सुप्रिया सुले कहती हैं तो हम मान लेते हैं, लेकिन ऐसा लगता नहीं है.
सुप्रिया सुले इस मामले में उद्धव सेना पर तो और तल्ख नजर आईं. उन्होंने कहा कि शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात पर गलत सवाल उठाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि सवाल उठाने वाले यह भी ध्यान दें कि उद्धव ठाकरे ने अजित पवार से मुलाकात की थी. यह मीटिंग भी तब हुई थी, जब अजित पवार को हमारी पार्टी से अलग हुए 17 दिन ही हुए थे. फिर भी हमने कोई सवाल नहीं किया.
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शरद पवार की बेटी और सांसद ने कहा कि हमारा यह मानना था कि अजित पवार दादा संवैधानिक पद पर हैं. ऐसे में उनसे मुलाकात करने में कोई बुराई नहीं थी. फिर भी अब शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात पर सवाल उठ रहे हैं. यह ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में संवाद होता है और इसमें कोई बुराई नहीं है.
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