दिल्ली के शालीमार बाग में अतिक्रमण हटाने का अभियान दूसरे दिन भी जारी है. इस अभियान के तहत प्रशासन सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए लगभग 150 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर रहा है. शालीमार बाग इलाके से सोमवार सुबह सामने आई तस्वीरों में कई मशीनों को अतिक्रमण हटाते हुए देखा गया. कई दो-तीन मंजिला मकान टूटे हुए भी नजर आए. भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बीच अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा है. अधिकारी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस अभियान को जारी रखे हुए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रहा एक्शन
प्रशासन ने रविवार से शालीमार बाग इलाके में ध्वस्तीकरण का यह अभियान शुरू किया था. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक नामित क्षेत्र में स्थित सभी अवैध निर्माणों को हटा नहीं दिया जाता और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती.
दिल्ली: शालीमार बाग में अतिक्रमण हटाने का अभियान दूसरे दिन भी जारी है, जिसके तहत अधिकारियों ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए 150 से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर रहे हैं। भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती हुई है, और अधिकारी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस… pic.twitter.com/JEA9jIF21t
— IANS Hindi (@IANSKhabar) June 1, 2026
क्या बोले अधिकारी?
सेंट्रल नॉर्थ दिल्ली के डीएम शैलेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि 143 घरों को चिन्हित किया गया था. इनमें 127 परिवार रह रहे थे. कुछ जगहों पर कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट भी चल रहे थे, जबकि कुछ लोगों ने मकान किराये पर दे रखे थे. अब तक करीब 60 प्रतिशत घरों को हटाया जा चुका है. उम्मीद है कि बचा हुआ अतिक्रमण आज शाम तक पूरी तरह हटा लिया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि विकास कार्य लगातार जारी रहें. यह क्षेत्र मास्टर प्लान में तीन-चार दशक पहले ही शामिल किया जा चुका था. वर्ष 1980 में प्रशासन ने इस जमीन का अधिग्रहण किया था.
यहां के रिकॉर्डेड मालिक पहले ही मुआवजा ले चुके हैं. जिन लोगों ने मुआवजा नहीं लिया था, उनका पैसा 1980 में ही ट्रेजरी में जमा करा दिया गया था. कुछ हिस्सों का प्रशासन ने पहले ही पजेशन ले लिया था, जबकि कुछ मामलों में कोर्ट में मुकदमे चल रहे थे. जैसे-जैसे मुकदमों का निस्तारण होता गया, प्रशासन समय-समय पर जमीन का पजेशन लेता रहा. वर्ष 2018 में 12 बीघा 6 बिस्वा जमीन का पजेशन लिया गया था. आज भी करीब 8 बीघा जमीन का पजेशन लेकर उसे लैंड एंड बिल्डिंग डिपार्टमेंट और फिर DDA और PWD को सौंपा जाएगा.

उन्होंने बताया कि यहां 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, यहां रह रहे लोगों का जमीन पर मालिकाना हक नहीं है. पुराने लैंडलॉर्ड्स पहले मुआवजा ले चुके हैं. वर्तमान में रह रहे लोग सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके रह रहे थे. शासन ने मानवीय आधार पर सरकार से विशेष अनुमति ली है. इसके तहत प्रत्येक परिवार को 3 लाख रुपये एक्स-ग्रेशिया सहायता के रूप में दिए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य यह है कि विस्थापित लोगों को यहां से दूसरी जगह जाने में आसानी हो. जो लोग बेघर हो रहे हैं, उनके लिए शाहदरा घेड़ा में फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
डीएम ने बताया कि इस इलाके में अक्सर जाम की समस्या रहती थी. बरसात के दौरान सड़क पर पानी भर जाता था और कई बार दुर्घटनाएं भी होती थीं. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण का काम किया जाएगा. अतिक्रमण हटाने के तुरंत बाद जमीन PWD को सौंप दी जाएगी, ताकि निर्माण कार्य शुरू किया जा सके.
अतिक्रमण हटाओ अभियान हैदरपुर गांव में शुरू किया गया, जहां ये ढांचे प्रस्तावित कॉरिडोर (सड़क संख्या 320) के निर्धारित 30 मीटर के भीतर पाए गए. यह कॉरिडोर शालीमार बाग रेलवे अंडरब्रिज को आउटर रिंग रोड से जोड़ता है. जिला के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई परियोजना को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका को न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के बाद की जा रही.
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