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कहां है शक्सगाम घाटी? 63 साल पहले पाकिस्तान ने क्यों चीन को सौंपा ये इलाका, जानें 5 बड़े सवालों का जवाब

Shaksgam Valley Dispute Explained: भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि यह भारतीय क्षेत्र है और उसके पास अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है.

कहां है शक्सगाम घाटी? 63 साल पहले पाकिस्तान ने क्यों चीन को सौंपा ये इलाका, जानें 5 बड़े सवालों का जवाब
Shaksgam Valley Dispute: शक्सगाम घाटी को ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है

Shaksgam Valley Dispute Explained: भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद एक बार फिर गहरा गया है. यह घाटी भारत के संप्रभु क्षेत्र में आती है और इसपर ड्रैगन ने अवैध कब्जा कर रखा है. भारत ने पिछले शुक्रवार को शक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि यह भारतीय क्षेत्र है और उसके पास अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है. अब इसपर पलटवार करते हुए चीन ने शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराया और कहा कि इस इलाके में उसकी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं “बिल्कुल उचित” हैं.

चलिए आपको एकदम आसान भाषा में 5 सवालों और उनके जवाबों के जरिए शक्सगाम घाटी का पूरा विवाद समझाते हैं.

Q- शक्सगाम घाटी कहां है?

शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley), जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उत्तरी भाग में स्थित है. यह सियाचिन ग्लेशियर के ठीक उत्तर में मौजूद है.

Q- शक्सगाम घाटी का विवाद क्या है?

साल 1947 में देश के बंटवारे से पहले शक्सगाम घाटी तक के जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था. लेकिन 1948 की सर्दियों में जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था. इसमें शक्सगाम घाटी का हिस्सा भी शामिल था. पाकिस्तान ने फिर 1963 में चीन के साथ एक सीमा समझौता कर लिया और शक्सगाम घाटी को चीन को सौंप दिया. यानी जिस क्षेत्र पर पहले ही उसका अवैध कब्जा था, उसे उसने चीन को सौंप दिया.

Q- पाकिस्तान ने चीन को शक्सगाम घाटी क्यों सौंपी?

वर्ष 1963 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के क्षेत्र को सौंपने का समझौता पाकिस्तान और चीन के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसने उनके लिए एक साझा सीमा प्रदान की, अन्यथा उनकी कोई सीमा नहीं होती. समझौते में एक खंड यह भी है कि पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर मुद्दे के निपटारे के बाद, संप्रभु प्राधिकरण औपचारिक सीमा संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए चीन सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करेगा.

कश्मीर मुद्दे पर चीन का आधिकारिक रुख यह है कि “जम्मू कश्मीर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित व शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.” जबकि भारत का कहना है कि जम्मू कश्मीर पर कोई विवाद नहीं है, विवाद तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर है और उसे वापस लेने के लिए बस पाकिस्तान से बात होगी, तीसरे किसी देश या संगठन को बीच में नहीं आने दिया जाएगा. 

Q- भारत और चीन, दोनों क्या दावा कर रहे हैं?

भारत का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा चीन को सौंपी गई यह जमीन कानूनी रूप से भारत की है, जबकि चीन इस 63 साल पुराने 'अवैध' समझौते को अपना आधार बना रहा है. भारत के विदेश मंत्रायल के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बता दी गई है.'' उन्होंने कहा, “हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसपर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है.”

जबकि चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा है, “सबसे पहले तो जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है... अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैं.” माओ ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की गई थी.

Q- चीन शक्सगाम घाटी क्यों चाहता है?

शक्सगाम घाटी के अहम लोकेशन के कारण चीन लालची हो रहा है. यह सीधे सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है. अगर चीन यहां पक्की सड़कें और बुनियादी ढांचा बना लेता है, तो भारतीय सेना को उत्तर (चीन) और पश्चिम (पाकिस्तान) दोनों तरफ से एक साथ सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. भारत और चीन दोनों अब एक ही जमीन के टुकड़े पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहे हैं. भारत जहाँ इसे "अवैध और जबरन कब्जा" बता रहा है, वहीं चीन ने पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में इसे "अपना क्षेत्र" कहकर भविष्य में बड़े सैन्य गतिरोध के संकेत दे दिए हैं.

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