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This Article is From Jul 04, 2022

संयुक्त किसान मोर्चा करेगा "वादाखिलाफी विरोधी सभा" का आयोजन, केंद्र पर लगाया वादे से पीछे हटने का आरोप

सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में, 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से 31 जुलाई शहीद उधम सिंह की शहादत दिवस तक, देशभर में जिला स्तर पर “वादाखिलाफी विरोधी सभा” आयोजित की जाएगी.

संयुक्त किसान मोर्चा करेगा "वादाखिलाफी विरोधी सभा" का आयोजन, केंद्र पर लगाया वादे से पीछे हटने का आरोप
देशभर में जिला स्तर पर “वादाखिलाफी विरोधी सभा” आयोजित की जाएगी.
नई दिल्ली:

रविवार को गाजियाबाद में संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सभी किसान संगठनों के चुनिंदा प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय बैठक में किसान आंदोलन को लेकर तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बात पर निराशा व्यक्त की, कि 9 दिसंबर 2021 को मोर्चा उठाने पर सरकार ने किसानों से जो वादे किए थे. उन पर केंद्र सरकार पूरी तरह मुकर गई है. ना तो एमएसपी पर कमेटी का गठन हुआ है और ना ही आंदोलन के दौरान किसानों पर लगाए गए झूठे मुकदमें वापस लिए गए हैं. सरकार बिजली बिल को संसद में लाने का प्रयास कर रही है. किसानों की सबसे बड़ी मांग, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, पर सरकार विचार करने को भी तैयार नहीं है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य लंबित मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा 500 जिलों में “वादाखिलाफी विरोधी सभा” आयोजित करेगा. संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान के अनुसार सरकार के इस वादाखिलाफी के विरोध में, 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से 31 जुलाई शहीद उधम सिंह की शहादत दिवस तक, देशभर में जिला स्तर पर “वादाखिलाफी विरोधी सभा” आयोजित की जाएगी. इस अभियान के अंत में 31 जुलाई को सरदार उधम सिंह के शहादत दिवस पर सुबह 11:00 से दोपहर 3:00 बजे तक देशभर में मुख्य मार्ग पर चक्का जाम किया जाएगा. 

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बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि अग्निपथ योजना के विरुद्ध किसान संगठन, बेरोजगार युवाओं और पूर्व सैनिकों को लामबंद करेगा, क्योंकि यह योजना राष्ट्र-विरोधी और युवा-विरोधी होने के साथ-साथ किसान-विरोधी भी है. अग्निपथ योजना के चरित्र का पर्दाफ़ाश करने के लिए 7 अगस्त से 14 अगस्त के बीच देशभर में “जय-जवान जय-किसान” सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पूर्व सैनिकों और बेरोजगार युवाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा.

बयान में कहा गया कि लखीमपुर खीरी हत्याकांड के 10 महीने बाद भी अजय मिश्र टेनी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहना देश की कानून व्यवस्था के साथ एक भद्दा मजाक है. संयुक्त किसान मोर्चा शुरू से किसानों को न्याय दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, और पीड़ित परिवारों को कानूनी व अन्य हर तरह की सहायता देता रहा है. इसी मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा लखीमपुर खीरी में 18-19-20 अगस्त को 75 घंटे का पक्का मोर्चा आयोजित करेगा, जिसमें देश भर से किसान नेता और कार्यकर्ता भाग लेंगे।

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Sanyukt Kisan Morcha, Anti-promises Meeting, Kisan Andolan
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