- अखिलेश यादव ने अयोध्या मामले और ग्राम प्रधानों के मुद्दे पर भाजपा सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की
- अखिलेश यादव ने भाजपा पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उनके शासन की समाप्ति की संभावना जताई
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जोरदार सियासी वार किया है. अयोध्या मामले से लेकर यूपी के ग्राम प्रधानों के मुद्दे पर बीजेपी की केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को घेरा है. आज एक्स पर एक घंटे के अंदर उन्होंने दो ट्वीट किए और बीजेपी पर जोरदार हमला किया.
'भाजपा का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा'
अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, 'भाजपा का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा. आखिर ‘दानभक्तों' का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया. अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति' का भी. भाजपा के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है. ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफे नहीं होते हैं. ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी' से आहत जनता कटाक्ष करते हुए कह रही है कि भाजपाई कह रहे हैं कि हमने कहा था कि ‘इस्तीफा' नहीं होता, हमने इस्तीफा नहीं ‘त्यागपत्र' दिया है.'
भाजपा का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 26, 2026
आख़िर ‘दानभक्तों' का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति' का भी।
भाजपा के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है।
ये…
'भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह' बच नहीं पाएगा'
सपा अध्यक्ष ने आगे लिखा, 'दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों' के काले कारनामों, करतूतों और कारगुजारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है. बंटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली' एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा' लेकर इधर-उधर भागें, बार्डर बंद कर दिये जाएं. अभी तो शुरुआत है, अब तो केयर फंड के साथ-साथ अनरजिस्टर्ड लोगों को अपने कुकृत्यों का हिसाब भी देना होगा. भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह' बच नहीं पाएगा. NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफे शुरू हो गए हैं तो ‘लीकाधिपति' का भी करवा दीजिए.'
‘असंवैधानिक' काम करने की सजा क्या होती है?'
इससे पहले अखिलेश यादव ने लिखा, 'उप्र भाजपा सरकार द्वारा एक तरफ झूठी तारीफ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार करवाये जा रहे हैं तो दूसरी तरफ माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने ये कहकर रंग मे भंग कर दिया कि ‘कार्यकाल खत्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फैसला असंवैधानिक है'. जनता पूछ रही है कि ‘असंवैधानिक' काम करने की सजा क्या होती है?'अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को इसलिए गांवों में घुसने नहीं देंगे क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा उन्हें प्रशासक बनाने के आदेश ने, उनमें कुछ नये काम करने की उम्मीद जगाई थी, जिसका वादा वो जनता से कर चुके थे, अब जनता तो तकनीकी पक्ष समझती नहीं है कि क्या हुआ, वो तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फंड-बजट-पैसा डबल इंजन के साथ मिल-बांटकर खा गये.'
'भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी'
सपा अध्यक्ष ने आगे लिखा, 'प्रधानों में इस बात का भी डर है कि कहीं ‘इन बीच के दिनों' के खर्चे का खामियाजा उनको अपनी जेब से न भरना पड़े. हो सकता है कल को ‘पैसा वापसी' का आदेश भी आ जाएं. जब कार्यकाल गलत साबित हो गया है, तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तो कानूनी रूप से गलत माना जाएगा. भाजपा ने प्रधानों को बहुत बुरा फंसा दिया है. वहीं प्रधानों ने जिन ठेकेदारों को काम दिया था, वो भी ‘इन बीच के दिनों' के बिलों का भुगतान करवाने के लिए प्रधानों का दरवाजा खटखटाएंगे. इसीलिए प्रधान अब भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की गांव-गांव में नाकाबंदी कर देंगे. भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी. भाजपा किसी घाट की नहीं रही. विशेष: पंचायती राज मंत्री तो घर से ही नहीं निकल पाएंगे, गांव पहुंचना तो दूर की बात है.'
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