कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को विदेश से लौटने के बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से उनके तुगलक रोड स्थित आवास पर मुलाकात की. वहीं पार्टी मुख्यालय में उनके नाम कमरा भी आवंटित हो गया है और उसमें नेम प्लेट भी लग गई है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने के लिए गुरूवार शाम दिल्ली में होने जा रही पार्टी महासचिवों एवं विभिन्न राज्यों के प्रभारियों की बैठक में प्रियंका भी शामिल होंगी. राहुल ने शनिवार को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों एवं कांग्रेस विधायक दल के नेताओं की भी बैठक बुलाई है ताकि आम चुनावों की तैयारियों की समीक्षा की जा सके. माना जाता है कि प्रियंका ने कांग्रेस के अन्य नेताओं से भी मिलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए चुनावी रणनीति पर चर्चा की. गौरतलब है कि प्रियंका पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव नियुक्त की गई हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव नियुक्त किए गए ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रियंका और अन्य कांग्रेस नेताओं की मुलाकात के दौरान मौजूद थे.
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गौरतलब है कि सपा और बीएसपी ने कांग्रेस को अभी अपने संगठन में शामिल नहीं किया है. इसके बाद से कांग्रेस ने भी इसकी परवाह न करते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर अकेले लड़ने कर दिया. इतना ही नहीं कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को भी राजनीति में उतार दिया. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 2 सीटें मिली थीं और कुल वोट प्रतिशत 8 से भी कम था. ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि पूर्वांचल में प्रियंका गांधी वाड्रा का जादू कितना चल पाता है. वाराणसी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसका असर पूरे पूर्वांचल पर पड़ता है, पिछले चुनाव में आजमगढ़ की सीट छोड़कर सभी सीटें एनडीए के खाते में गई थीं.
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ऐसा पहली बार नहीं है कि प्रियंका गांधी वाड्रा राजनीति से वास्ता रख रही हों, वो अमेठी और रायबरेली में राहुल और अपनी मां सोनिया गांधी के लिए प्रचार करती रही हैं. इन दोनों ही सीटों पर प्रियंका को कोई खास मेहनत नहीं करती पड़ती थी क्योंकि परंपरागत तौर पर यह सीटें कांग्रेस की रही हैं. हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस यहां बुरी तरह से हारी थी और इस चुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा ने जमकर प्रचार किया था.
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इनपुट : भाषा
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