- रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले की जांच में UP से गिरफ्तारियों के बाद एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
- बिश्नोई गैंग ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अलग-अलग मॉड्यूल बनाकर अपना नेटवर्क मजबूत किया है.
- गैंग कम उम्र के बेरोजगार युवकों को फंसाकर हथियार चलाने और वैचारिक रूप से भड़काने की ट्रेनिंग देता है.
फिल्म निर्माता–निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की जांच अब सिर्फ एक वारदात तक सीमित नहीं रह गई है. उत्तर प्रदेश से हुई गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों के सामने एक संगठित और खतरनाक नेटवर्क की तस्वीर उभर रही है. सूत्रों के मुताबिक, कुख्यात बिश्नोई गैंग ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है और यहां जिला स्तर पर अलग-अलग “मॉड्यूल” तैयार किए जा रहे हैं.
जांच में सामने आया है कि सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, इटावा, एटा, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, नोएडा, गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे जिलों में गैंग की हलचल बढ़ी है. सूत्र बताते हैं कि इन इलाकों को चुनने की वजह सिर्फ स्थानीय नेटवर्क नहीं, बल्कि हरियाणा और दिल्ली की नजदीकी भी है. माना जाता है कि इन दोनों राज्यों में गैंग का असर पहले से मजबूत है, इसलिए यूपी के इन जिलों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और रिक्रूटमेंट के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
‘बहराइच' और ‘आगरा मॉड्यूल' की कहानी
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में गैंग ने कथित तौर पर “बहराइच मॉड्यूल” का इस्तेमाल किया था, जबकि रोहित शेट्टी के घर फायरिंग के लिए “आगरा मॉड्यूल” को एक्टिव किया गया. दोनों मामलों की जांच में मिले इनपुट से यह इशारा मिलता है कि यूपी के अलग-अलग जिलों में इसी पैटर्न पर छोटे-छोटे ऑपरेशनल ग्रुप तैयार किए जा रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर एक्टिव हो जाते हैं.
कम उम्र के युवाओं को ऐस फंसाया जा रहा
सूत्रों का कहना है कि गैंग सीधे बड़े अपराधियों को नहीं बल्कि कम उम्र के बेरोजगार और महत्वाकांक्षी युवकों को निशाना बना रहा है. ऐसे लड़के जो जल्दी नाम और पैसा कमाने का सपना देखते हैं, उन्हें “बड़ा गैंगस्टर बनने” और “शॉर्टकट से कमाई” का लालच दिया जाता है.
पहले दोस्ती और भरोसे का जाल बुना जाता है, फिर उन्हें खास जगहों पर बुलाकर कथित ट्रेनिंग दी जाती है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन सेशंस में सिर्फ हथियार चलाने की ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि वैचारिक तौर पर भी भड़काया जाता है. उन्हें बताया जाता है कि वे किसी “मिशन” का हिस्सा हैं, दुश्मन कौन है और क्यों कार्रवाई जरूरी है. इस तरह मानसिक तौर पर तैयार करने के बाद ही उन्हें किसी वारदात में आगे किया जाता है, ताकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे रहें.
मुंबई क्राइम ब्रांच और UP एसटीएफ का एक्शन
इन इनपुट्स के सामने आने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच और यूपी एसटीएफ ने जांच तेज कर दी है. संभावित ट्रेनिंग ठिकानों, फंडिंग चैनल और लोकल हैंडलर्स की पहचान की जा रही है. टेक्निकल सर्विलांस के साथ-साथ जमीनी इनपुट भी जुटाए जा रहे हैं, ताकि इस नेटवर्क को जड़ से तोड़ा जा सके.
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