वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल ऐसे वक्त पर बजट पेश करेंगी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, और इसकी वजह से अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और एक्सपोर्टरों में अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है. साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% रेसिप्रोकाल टैरिफ की तलवार भी भारत पर लटक रही है.उद्योग जगत को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजटीय प्रस्तावों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के इस ताज़ा घटनाक्रम का अंतराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखेंगी.
उद्योग संघ - कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) का कहना है कि अगस्त, 2025 से ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ट्रेड का स्वरुप बदला है. अब बदलती अंतराष्ट्रीय परिस्थिति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है. लेकिन इसके लिए वित्त मंत्री को इस साल के बजट में विशेष प्रावधान शामिल करने होंगे.
CII की नेशनल कमिटी ऑन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के चेयरमैन विनोद शर्मा के मुताबिक राजनीतिक अनिश्चितता भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला केंद्र (Global Supply Chain Hub) के रूप में विकसित करने का अवसर है. भारत को चीन के विकल्प के तौर पर एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित करने के लिए देश में व्यापार करने की लागत (Cost of Doing Business) को कम करना होगा. इंडस्ट्री के लिए बिजली की कीमत भारत में अधिक है, ये लगभग चीन की तुलना में दोगुनी है. विनिर्माण इकाई चलाने में शामिल रसद लागत ( logistics cost) को भी कम करने की तत्काल आवश्यकता है.
तीन दशक से नॉएडा इंडस्ट्रियल एरिया में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चला रहे विनोद शर्मा मानते हैं, निचले स्तर की नौकरशाही प्रणालियों में सुधार करके व्यापार करना आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार बेहद ज़रूरी है.उद्योग संघ CII ने बजट 2026-27 में सीमा शुल्क (Customs Duties) को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि कच्चे माल पर सीमा शुल्क 0% से 2.5% और तैयार माल पर 5% से 10% के बीच होना चाहिए.
उद्योग जगत चाहता है कि बजट 2026-27 में AI, Deep Tech और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष फोकस करना भी ज़रूरी होगा.उद्योग संघ PHDCCI ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिए अपनी मांगों को सूची में कहा है कि इस साल के बजट में Artificial Intelligence (AI), Deep Tech और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मज़बूत करने पर फोकस जरूरी है. AI भविष्य है, इसीलिए देश में एक मजबूत AI इकोसिस्टम बनाने के लिए अधिक बजटीय आवंटन ज़रूरी होगा.
भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, अब इस क्षेत्र में ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए इसे और आगे बढ़ाने की ज़रुरत है. इसके लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मज़बूत और उसका विस्तार करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान ज़रूरी होंगे.साथ ही, PHDCCI ने बजट में 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सुधारों का एक नया रोडमैप ('Next Wave of Economic Reforms') का भी सुझाव दिया है.
PHDCCI के सेक्रेटरी जनरल रणजीत मेहता ने एनडीटीवी से कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त मंत्री "विकसित भारत" के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए नया आधार तैयार करने के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर पूंजीगत खर्च (Capex) बढ़ाएंगी. वित्त मंत्री को Ease of Doing Business के साथ-साथ Cost of Doing Business पर भी ध्यान देना चाहिए, उन्हें व्यवसाय करने की लागत से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. विकसित भारत के लक्ष्य को बजटिंग के साथ align करने की ज़रुरत है".
PHDCCI के मुताबिक, देश में करीब 7 करोड़ छोटे-लघु (MSME) उद्योग हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था में MSME उद्यमियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए उन तक आसान शर्तों पर क्रेडिट पहुँचाना ज़रूरी है, और बेहतर मार्किट एक्सेस के लिए सपोर्ट की ज़रुरत है.PHDCCI का सुझाव है कि अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता के माहौल में एक्सपोर्ट पर आधारित ग्रोथ स्ट्रेटेजी को आगे बढ़ाना ज़रूरी है, और बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान करना बेहतर होगा.
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