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This Article is From Nov 03, 2020

राजस्थान विधानसभा ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ संशोधन विधेयक पारित किया

पंजाब व छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राजस्थान सरकार ने भी केंद्र के हालिया कृषि कानूनों के खिलाफ तीन संशोधन विधेयक सोमवार को पारित किए.

राजस्थान विधानसभा ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ संशोधन विधेयक पारित किया
राजस्थान के मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि पूरा देश केंद्र के कानूनों के खिलाफ है (फाइल फोटो)
जयपुर:

पंजाब व छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राजस्थान सरकार ने भी केंद्र के हालिया कृषि कानूनों के खिलाफ तीन संशोधन विधेयक सोमवार को पारित किए. सदन ने सरकार द्वारा पेश संशोधन विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया. मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इस दौरान सदन से बहिर्गमन किया. इन विधेयकों पर दिन भर हुई चर्चा के बाद राज्य विधानसभा ने ‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण)(राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा कर पर करार(राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 तथा आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 को पारित कर दिया.

इन विधेयकों का उद्देश्य केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी तीन कानूनों का राज्य के किसानों पर प्रभाव 'निष्प्रभावी' करना है. हालांकि ये विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद ही कानून बनेंगे. राज्य के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने शनिवार को सदन में ये विधेयक पेश किए थे. चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इन विधेयकों में मोटे तौर पर यह प्रावधान किया गया है कि किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा किसानों के साथ उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी से कम दर पर खरीदने का कोई समझौता वैध नहीं होगा.

विधेयक में किसानों के उत्पीड़न पर कम से कम तीन साल की कैद व पांच लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है. धारीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हालिया पारित तीन कृषि कानूनों का देश भर में उसी तरह विरोध हो रहा है जैसा कुछ साल पहले भू अधिग्रहण कानून को लेकर हुआ था और केंद्र सरकार को इन कानूनों को भी अंतत: वापस लेना पड़ेगा. उन्होंने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कृषि राज्य सरकार का अनन्य विषय है. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि संबंधी कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का एक बार भी जिक्र नहीं किए जाने का उल्लेख किया.

धारीवाल ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुआ कहा,'‘तीन कानूनों में आपने एक बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) शब्द नहीं लिखा तो क्यों नहीं आप पर शक करें और आरोप लगाएं.'' इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए राज्य के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लाये गये तीनों कानून किसान विरोधी है और किसान परिवारों के हितों पर कुठाराघात है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति किसान परिवार से जुड़ा हुआ है. इन कानूनों से आने वाले समय में किसान मजदूर बनकर रह जायेगा. बड़ी-बड़ी कंपनियां अनुबंध के आधार पर किसानों की जमीन लेकर मनमाने तरीके से खेती करवायेगी और किसानों की फसलों का कंपनियां जैसा चाहेगी वैसा बाजार भाव तय करेगी.

नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया व विपक्षी दल भाजपा ने केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ संशोधन विधेयक लाए जाने के लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा. कटारिया व वक्ताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किसान हित के लिए उठाई गयी विभिन्न पहलों को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि किसानों का जीवन बदलने के लिए अगर सही मायने में किसी ने काम किया है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. चर्चा के बाद उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कृषक हित में लाए गए कानूनों के खिलाफ विधेयक पारित करने का ‘'कुकृत्य इस सदन में हो रहा है, हम इसके साक्षी नहीं बनेंगे. हम इनके विरोध में बहिर्गमन करते हैं.' विधानसभा ने सोमवार को राजस्थान महामारी (संशोधन) विधेयक, 2020, तथा सिविल प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 ध्वनिमत से पारित कर दिए. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि संबंधी कानूनों का कई जगह विरोध हो रहा है और कांग्रेस शासित पंजाब व छत्तीसगढ़ पहले ही इनके खिलाफ विधेयक पारित कर चुका है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहलोत ने 20 अक्तूबर को ट्वीट किया था,' भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, सोनिया गांधी व राहुल गांधी के नेतृत्व में हमारे अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और हमारी पार्टी किसान विरोधी कानून जो राजग सरकार ने बनाए हैं, का विरोध करती रहेगी. आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किये हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा. ' उल्लेखनीय है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने इन विधेयकों के पारित होने के बाद पन्द्रहवीं विधानसभा के पंचम सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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