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जाति जनगणना में ओबीसी कैटिगरी का विकल्प न होने का आरोप, राहुल गांधी और खरगे का PM मोदी को पत्र

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि हमारी मांग है कि बिहार और तेलंगाना की तर्ज पर जाति जनगणना कराई जाए.

जाति जनगणना में ओबीसी कैटिगरी का विकल्प न होने का आरोप, राहुल गांधी और खरगे का PM मोदी को पत्र
  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बिहार और तेलंगाना के जाति जनगणना मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग की है
  • उन्होंने कहा कि जाति जनगणना में ओबीसी का कॉलम जोड़ा जाए जिससे आरक्षण के आधार को मजबूत किया जा सके
  • राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर वर्तमान जाति जनगणना योजना रद्द करने का आग्रह किया है
नई दिल्ली:

कांग्रेस ने जाति जनगणना में ओबीसी का कॉलम जोड़ने की मांग उठाई है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि बिहार और तेलंगाना के जाति जनगणना के मॉडल को लागू करना चाहिए. उन्होंने कहा कि उसी आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना कराई जाए, तभी सही नतीजे आएंगे और आरक्षण के आधार को मजबूत किया जा सकेगा. जयराम रमेश ने कहा कि अभी वक्त है क्योंकि अभी यह जाति जनगणना लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल के ही कुछ इलाकों में शुरू हुई है. ऐसे में अभी वक्त है कि सुधार कर लिया जाए. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इसी संबंध में पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. 

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि बिहार की जाति जनगणना के सर्वे 2 अक्तूबर, 2023 को आए थे. इसके बाद तेलंगाना के सर्वे भी फरवरी 2025 में आए थे. हमारी मांग है कि उसी सर्वे की तरह जाति जनगणना कराई जाए. उसी मेथडेलॉजी का इस्तेमाल किया जाए. राहुल गांधी और खरगे ने यही मांग की है कि मौजूदा प्लान को रद्द किया जाए और बिहार-तेलंगाना के मॉडल पर जनगणना कराएं. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि ऑल पार्टी मीटिंग बुलाकर आखिरी फैसला लिया जाए. इसके लिए कुछ एक्सपर्ट्स की भी सलाह ली जा सकती है. हमें उम्मीद है कि पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के लेटर को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. 

बता दें कि कांग्रेस समेत कई दलों और एक्टिविस्ट्स का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर कराई जा रही जाति जनगणना में ओबीसी का कॉलम नहीं है. इसके अलावा जाति वाले कॉलम को खाली रखा गया है, जिसमें लोग खुद जो बताएंगे वही भरा जाएगा. ऐसे में देश भर में अलग-अलग उपनामों को जाति के तौर पर दर्ज करने से लाखों जातियां हो जाएंगी और सही डेटा सामने नहीं आ सकेगा. इस तरह विपक्ष चाहता है कि ओबीसी वाला कॉलम एससी और एसटी की तरह ही होना चाहिए और जातियों को लेकर भी ऐसी व्यवस्था रहे कि उन्हें दिए गए विकल्पों में से कुछ पर टिक करना हो. हालांकि अब तक इस मामले में लगे आरोपों पर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है.

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