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राहुल, अखिलेश और प्रियंका.. संसद में सपा-कांग्रेस की सीक्रेट मीटिंग, बनी यूपी चुनाव की रणनीति

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने करीब एक घंटे तक बैठक की. माना जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027, सीट बंटवारे और विपक्षी रणनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

राहुल, अखिलेश और प्रियंका.. संसद में सपा-कांग्रेस की सीक्रेट मीटिंग, बनी यूपी चुनाव की रणनीति
सीट शेयरिंग पर क्या हुई बात?
File Photo

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने करीब एक घंटे तक बातचीत की. लोकसभा में नेता विपक्ष के दफ्तर में हुई इस बैठक के दौरान प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं. इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है लेकिन माना जा रहा है कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे से लेकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा हुई. राहुल गांधी और अखिलेश यादव इससे पहले आठ जून को इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान मिले थे लेकिन तब दोनों नेताओं में अलग से कोई बात नहीं हुई थी. 

'सदन स्थगित होने पर लोग मिलते ही हैं'

राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकात को लेकर पूछे जाने पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले तो सवाल टालने की कोशिश की फिर कहा कि 'सदन स्थगित होने पर लोग मिलते ही हैं'. दरअसल पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों में कामकाज ठप रहा. बड़ी बात यह रही कि लोकसभा की कार्यवाही पहली बार स्थगित होने के बाद डिंपल यादव समेत समाजवादी पार्टी के ज्यादातर सांसद जंतर मंतर के लिए रवाना हो गए, लेकिन अखिलेश यादव अपने दो-तीन सांसदों के साथ संसद भवन स्थित राहुल गांधी के कमरे में पहुंचे. अखिलेश यादव के साथ अयोध्या के एसपी सांसद अवधेश प्रसाद भी पहुंचे थे लेकिन वो मुख्य बैठक में शामिल नहीं थे. बैठक में केवल राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी मौजूद रहे.

बैठक को लेकर पूछे जाने पर अवधेश प्रसाद ने कहा कि बहुत सी बातें रणनीति का हिस्सा होती हैं और उनका खुलासा करना उचित नहीं होता. 

यूपी चुनाव से पहले अहम मानी जा रही यह बैठक

राहुल गांधी और अखिलेश की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बीते दिनों में यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे में बराबरी यानी 403 में से 200 सीटों की मांग कर रहे हैं. यही नहीं हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर मुस्लिमों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था. यूपी कांग्रेस प्रभारी गौतम और सांसद इमरान मसूद के ऐसे बयानों पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता भी पलटवार करते रहे हैं. 

बदले इमरान मसूद के सुर

बहरहाल इस बैठक के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के सुर बदले नजर आए. उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव बड़े नेता हैं. बड़े नेता बैठे हैं तो रास्ते निकलेंगे. मैं भी यही कह कर रहा था कि बैठिए . अगर हम हर चीज को टालेंगे तो अच्छी बात नहीं है. मैं राहुल गांधी का सिपाही हूं. उम्मीद के ऊपर दुनिया कायम है. उम्मीद के आसपास ही सीटें मिलेंगी.'

कांग्रेस भले ही दो सौ सीटों का दावा करती हो लेकिन सूत्रों के मुताबिक उनकी नज़र करीब सौ सीटों पर है. कांग्रेस चाहती है कि इनमें से समाजवादी पार्टी उसे ज्यादा ऐसी सीटें दे, जहां गठबंधन का समीकरण मजबूत हो. कांग्रेस की दलील है कि उसे ज्यादा सीटें मिली तो दलित वोटरों का समाजवादी पार्टी में भरोसा बढ़ेगा. बीते लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन को यूपी की 80 में से 43 सीटें मिलने के पीछे दलित वोटों को बड़ी वजह माना गया. समाजवादी पार्टी के 37 और कांग्रेस के  सांसद चुने गए. इसी बात को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने यूपी का प्रभारी दलित समाज से बनाया है.

गठबंधन पर सपा का क्या नजरिया?

गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी का नजरिया अलग है. अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सीट नहीं जीत महत्वपूर्ण है. समाजवादी पार्टी एक महत्वपूर्ण सूत्र के मुताबिक अखिलेश यादव चाहते हैं कि कांग्रेस अपने दावे वाली सीटों के साथ संभावित उम्मीदवार की सूची भी उपलब्ध कराए ताकि इसका मूल्यांकन किया जा सके कि क्या उस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार ही सबसे बेहतर विकल्प होगा या कोई और? उन्होंने कहा कि ये चुनाव बेहद अहम है. बदलाव चाहने वाले वोटर को विकल्प मालूम है लेकिन चुनाव जीतने के लिए बूथ के स्तर पर लड़ने वाला मजबूत कार्यकर्ता चाहिए. कांग्रेस के पास जुझारू कार्यकर्ता नहीं हैं. 

2017 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था. तब एसपी ने कांग्रेस को 105 सीटें दी थी. इसी के आधार पर कांग्रेस इस बार भी सौ से ज्यादा सीटों की उम्मीद लगा रही है. लेकिन समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है तब हालत कुछ और थे अब कुछ और हैं. दरअसल उस वक्त सीएम अखिलेश यादव को पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा था. शिवपाल ने अलग पार्टी बना ली थी. ऐसे में कांग्रेस को सौ से अधिक सीटें मिल गईं लेकिन अब इसमें मुश्किल आएगी. कुल मिलाकर समाजवादी पार्टी के गणित में कांग्रेस को 80 के करीब सीटें ही मिलती दिख रही हैं. 

कांग्रेस का पास क्या विकल्प?

कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं है. बीते विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के प्रभारी रहते अकेले चुनाव में उतरी कांग्रेस को महज 2 फीसदी वोट और 2 सीटें मिली थीं. लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस सौ से कम सीटों पर राजी हो जाएगी, ये कहना अभी मुश्किल है. कांग्रेस का मानना है अकेले दम पर अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते. ऐसे में उन्हें सीट बंटवारे के मामले में लचीला रुख अपनाना होगा. 

अखिलेश यादव के सामने सीएम योगी आदित्यनाथ को हैट्रिक से रोकने की चुनौती है. इस मुहिम में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारा काफ़ी महत्वपूर्ण है. संसद भवन में बैठकर यूपी विधानसभा को लेकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने जो रणनीति बनाई है उसके सामने आने का सबको इंतजार है.

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