- राघव चड्ढा ने राज्यसभा में भारत में भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड की अव्यवस्था को बड़ी प्रशासनिक चुनौती बताया
- भारत में 66% सिविल विवाद जमीन से संबंधित हैं और 45 प्रतिशत संपत्तियों के पास स्पष्ट स्वामित्व प्रमाण नहीं हैं
- संपत्ति पंजीकरण दक्षता में भारत 190 देशों में 133वें स्थान पर है
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने देशभर में भूमि और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की अव्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे “भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में एक” बताया. उन्होंने संसद में जोर देकर कहा कि भारत को तुरंत अपने भूमि एवं संपत्ति रिकॉर्ड को ब्लॉकचेन तकनीक पर स्थानांतरित करना चाहिए, ताकि लंबे समय से जारी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का स्थायी समाधान निकल सके.
राघव चड्ढा ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत में जमीन से संबंधित रिकॉर्ड इतने बिखरे हुए और अविश्वसनीय हैं कि आम नागरिक को अपनी ही संपत्ति साबित करने के लिए महीनों नहीं, बल्कि कभी‑कभी सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दलाल और बिचौलिए पूरे सिस्टम पर कब्जा किए हुए हैं, जिससे आम आदमी का शोषण होता है और जमीन के सौदों में पारदर्शिता खत्म हो जाती है.
उन्होंने आंकड़े सामने रखते हुए बताया
- 66% सिविल विवाद भारत में जमीन संबंधी होते हैं.
- 45% संपत्तियों के पास स्पष्ट स्वामित्व प्रमाण (क्लियर टाइटल) नहीं है.
- 48% संपत्तियाँ पहले से ही किसी न किसी विवाद में फंसी हुई हैं.
- संपत्ति पंजीकरण दक्षता में भारत 190 देशों में 133वें स्थान पर है.
- किसी साधारण संपत्ति बिक्री को भी 2 से 6 महीने लग जाते हैं.
- अभी भी 6.2 करोड़ दस्तावेज डिजिटाइजेशन की प्रतीक्षा में हैं.
उन्होंने कहा कि यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि आम नागरिक के जीवन को भी असहनीय रूप से जटिल बना देती है. किसी भी विवाद के अदालत पहुंचने पर फैसला आने में औसतन 7 वर्ष लग जाते हैं, जो नागरिकों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. राघव चड्ढा ने समाधान के रूप में नेशनल ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्टर बनाने की मांग की. उन्होंने समझाया कि ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी हो सकता है.
In Parliament, I explained why India must put land & property records on BLOCKCHAIN.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) February 10, 2026
Land records in India are in utter chaos. Ordinary citizens are made to run from pillar to post at registrar offices, while dalals and middlemen capture the system. Circle rates are exploited to… pic.twitter.com/zeI4KzL0mz
इससे जमीन के स्वामित्व की जांच तुरंत हो जाएगी और हर ट्रांजैक्शन बिक्री, विरासत, म्यूटेशन स्वयं स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो जाएगा. उन्होंने स्वीडन, जॉर्जिया और UAE जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां संपत्ति के लेन-देन कुछ ही मिनटों में निपट जाते हैं और विवादों में भारी कमी आई है.
चड्ढा ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को “अव्यवस्था से स्पष्टता” की ओर बढ़ना होगा. भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था को बाधा पैदा करने वाली प्रणाली की जगह समाधान देने वाली व्यवस्था बनाना होगा. उन्होंने कहा कि यदि भारत इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाता, तो करोड़ों लोग हमेशा इसी भ्रष्ट और भ्रमित प्रणाली में फंसे रहेंगे.
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