- उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ी इलाकों में करीब दस हजार एकड़ सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया है
- उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्यभर में उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड लागू करने की योजना बनाई गई है
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रही हिंसा को संघ ने स्टेट स्पॉन्सर्ड हिंसा करार दिया है
उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ी इलाकों में सरकारी जमीन के अतिक्रमण के बढ़ते मामलों पर शक्ति से पहल करते हुए करीब 10000 एकड़ सरकारी जमीन को अवैध अतिक्रमण से खाली कर लिया है.दिल्ली के ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित दिल्ली शब्दउत्सव में एक संवाद के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह महत्वपूर्ण बात कही.
उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक मूल्य बनी रही है हमारा संकल्प है. पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. मैं इसको "लैंड जिहाद" की संज्ञा देता हूं. पहाड़ी इलाकों में सरकारी भूमि का अतिक्रमण किया गया. हमने सरकारी जमीन के अतिक्रमण के खिलाफ एक अभियान शुरू किया. हमने उत्तराखंड में 10,000 एकड़ से ज्यादा की सरकारी जमीन पर से अतिक्रमण खत्म कर वापस लिया है.
दिल्ली शब्दोत्सव में जन संवाद के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हम लोग का सवाल भी उठा. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कहा कि बांग्लादेश में जो घटनाएं हुई है. वह एक स्टेट स्पॉन्सर्ड हिंसा जैसी हो रही है. कोई कार्रवाई इसे रोकने के लिए नहीं की जा रही है. पूरी दुनिया को इसके बारे में ध्यान देना चाहिए. कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह का समर्थन नहीं होना चाहिए. पूरी दुनिया को मिलकर ऐसी घटनाओं पर लगाम कसना चाहिए. मुझे लगता आने वाले समय में यह परीस्थिति बदलनी चाहिए.
दिल्ली शब्दउत्सव में कई घंटे तक चले जन संवाद के दौरान कॉमन सिविल कोड और कृष्ण जन्मभूमि मामले से जुड़े कानूनी कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई.चर्चा के दौरान Gen Z की बढ़ती आकांक्षाओं का भी विस्तार से विश्लेषण किया गया, और भारत को एक विकसित देश बनाने के लक्ष्य में उनकी भूमिका पर भी चर्चा हुई.
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