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This Article is From Nov 05, 2025

पुष्कर मेले में लाखों में बिक रहे जानवर, सरकार ने खोला GST कैंप, करोड़ों की कीमत वाले घोड़ों का राज भी खुला

राजस्थान के पुष्कर मेले में करोड़ों के घोड़ों की बिक्री की खबरों ने जीएसटी विभाग के कान खड़े कर दिए. इसके बाद तो मेले में कैंप ही खोल दिया गया है. अधिकारी ने बताया है कि घोड़ों 5 प्रतिशत का जीएसटी टैक्स लगेगा.

पुष्कर मेले में लाखों में बिक रहे जानवर, सरकार ने खोला GST कैंप, करोड़ों की कीमत वाले घोड़ों का राज भी खुला
पुष्कर मेले में लाखों में बिक रहे घोड़े
  • पुष्कर मेले में लाखों की कीमत में बिक रहे हैं घोड़े, सरकार ने खोला जीएसटी कैंप
  • अधिकारियों ने घोड़ों की करोड़ों की कीमतों का राज भी खोल दिया
  • सरकार ने घोड़ों पर 5 प्रतिशत का जीएसटी लगाया है, मेले में आए हैं सैकड़ों घोड़े
अजमेर:

राजस्थान के पुष्कर में मशहूर पशु मेले में घोड़ों की बिक्री पर जीएसटी लागू किया जा रहा है. ऐसा पहली बार किया जा रहा है. घोड़ों की बिक्री पर 5% जीएसटी लगाने का फैसला किया गया है. इसके अलावा मेले में नया कैंप कार्यालय भी स्थापित किया गया है. मेले में सरकार ने जीएसटी की एक टीम को तैनात किया है ताकि पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध इस मेले में जीएसटी के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके. 

घोड़े पर लग रहा है 5% का जीएसटी 

अजमेर के सर्कल अधिकारी एच. के. कविया ने बताया कि अन्य जानवरों की बिक्री पर जीएसटी नहीं लगाया गया है. उन्होंने बताया लेकिन जीवित घोड़े पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है. उन्होंने बताया कि जीएसटी तभी लागू किया जाता है जब बिक्री की राशि 40 लाख रुपये से अधिक की हो. उन्होंने बताया कि अगर कोई घोड़ा 40 लाख से अधिक में बिकता हो तो जीएसटी देना अनिवार्य है. कविया ने बताया कि अगर कारोबारी चाहें तो इससे कम बिक्री पर भी स्वेच्छा से जीएसटी दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि पशु व्यापारियों को जीएसटी भुगतान की प्रक्रिया में सहायता मिल सके. उन्होंने बताया कि जीएसटी के जरिए विभाग राजस्व बढ़ाना चाहता है. गौरतलब है कि 2–3 जीएसटी अधिकारी हर दिन पुष्कर मेले में कैंप करते हैं और राज्य के पशु चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय में काम करते हैं. पशु चिकित्सा विभाग हर घोड़े की बिक्री या लेनदेन के लिए एक चालान या यात्रा परमिट जारी करता है.

खुल गया 15 करोड़ वाले घोड़े का राज

राजस्व विभाग के अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया में कुछ घोड़ों की कीमतें करोड़ों रुपये में बताई जा रही थी. ये सुनकर विभाग चौकन्ना हुआ. चंडीगढ़ के शाहबाज ने अपने घोड़े की कीमत 15 करोड़ रुपए बताई थी जबकि उनके मालिक गैरी गिल ने एएनआई को बताया था कि उन्हें 9 करोड़ रुपये का ऑफर मिला है. पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ आलोक खरे ने बताया कि यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यह दिखा रहे हैं कि घोड़े 13 करोड़ तक में बिक रहे हैं। जाहिर है, इससे जीएसटी विभाग सतर्क हुआ है. लेकिन ये कीमतें भ्रामक हैं, अब तक कोई भी घोड़ा 1 करोड़ में नहीं बिका है.

8-10 लाख रुपये में बिक रहे हैं घोड़े 

मेले के कई चर्चित घोड़े आए हैं जिनकी कीमत लाखों में है. एक बादल नाम का घोड़ा है जिसकी कीमत 15 लाख है. शहजादी (51 लाख) और नगीना (1 करोड़) है. इन घोड़ों की मीडिया में खूब चर्चा रही. पशुपालन विभाग के अनुसार, घोड़ों की अधिकतम बिक्री 2–3 लाख से लेकर 8–10 लाख रुपये तक रही है. विभाग हर घोड़े की बिक्री पर प्रमाणपत्र और ट्रांसफर परमिट जारी करता है.

पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक खरे ने बताया कि पुष्कर मेले में लगभग 4,500 घोड़े हैं और किसी भी घोड़े की बिक्री 40 लाख से अधिक में नहीं हुई है. जिस पर जीएसटी लागू होता है. जीएसटी अधिकारियों ने हमारे रिकॉर्ड की जांच की है. उन्होंने बताया कि हमारे पास हर घोड़े और जानवर की बिक्री का रिकॉर्ड है. अब तक किसी भी जानवर की बिक्री करोड़ों में नहीं हुई है.

महंगे घोड़े की कीमतों का खुल गया राज 

ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसाइटी के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह पोसाना ने कहा कि कई घोड़े के मालिक अपनी घोड़ियों या नर घोड़ों को प्रदर्शित करने के लिए भी आते हैं. वे चाहे तो कोई भी कीमत बता सकते हैं, लेकिन असली मूल्य तो तभी तय होगा जब घोड़ा वास्तव में बिकेगा. कई घोड़े प्रजनन (Breeding) के लिए रखे जाते हैं, इसलिए मालिक उन्हें प्रदर्शित करते हैं और ऊंची कीमत बताते हैं, पर वास्तव में वे उन्हें उस दर पर बेचते नहीं हैं. यह अपने पास मौजूद संपत्ति का एक मूल्य तय करने जैसा है.

सोशल मीडिया में छाया है पुष्कर मेला 

कई सोशल मीडिया रील्स और यूट्यूब वीडियोज़ ने पुष्कर मेले के घोड़ों और भैंसों को “सितारा” बना दिया है, जहां उन्हें आसमान छूती कीमतों के टैग के साथ दिखाया जा रहा है. इन कीमतों ने जीएसटी विभाग को सतर्क कर दिया है. और अब विभाग इस पशु मेले पर कड़ी निगरानी रखेगा.

लेखक के बारे में
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हर्षा कुमारी सिंह
Resident Editor, NDTV Rajasthan
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