- पंजाब कांग्रेस में संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल से नेताओं की बैठक के बाद विवाद शांत होने के संकेत मिले हैं
- पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी आलाकमान के फैसले का सम्मान करते हुए पूर्ण समर्थन जताया है
- कांग्रेस आलाकमान ने अनुशासनहीनता बर्दाश्त न करने का संदेश देते हुए बागी नेताओं को संयम बरतने को कहा था
करीब दो हफ़्ते की खींचतान के बाद पंजाब कांग्रेस का विवाद थमता नजर आ रहा है. कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल के साथ बैठक के बाद बागी गुट की अगुवाई कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि वो पार्टी आलाकमान के फ़ैसले के साथ हैं.वेणुगोपाल ने चन्नी के अलावा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह और राणा गुरजीत को मिलने बुलाया था. ये चारों नेता मुख्य रूप से पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से राजा वडिंग को हटाने की मांग की अगुवाई कर रहे थे. वेणुगोपाल ने कांग्रेस मुख्यालय में सभी नेताओं से एक-एक कर मुलाक़ात की.
हम पार्टी आलाकमान का सम्मान करते हैं
बैठक के बाद चन्नी ने कहा कि हम पार्टी के साथ हैं. पार्टी आलाकमान का सम्मान करते हैं. राहुल गांधी हमारे नेता हैं. हम उनसे प्यार करते हैं. उनके साथ ही जीना-मरना है.पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन से जुड़े विवाद पर विराम लगाते हुए चन्नी ने कहा कि ये अनावश्यक मीडिया ट्रायल हो गया. हमारा कोई मन किसी को शर्मिंदा करना या किसी को नीचा दिखाने का नहीं है. हम बस पंजाब में पार्टी को आगे बढ़ाना चाहते हैं. हमनें अपना पक्ष रखा, आलाकमान ने सुना. फैसला हमेशा ही आलाकमान का होता है. जो फैसला आलाकमान का है वो मानेंगे और उनके साथ चलेंगे... ऑल इज वेल."
पंजाब में 32 फीसदी दलित आबादी
दलित समाज से आने वाले चन्नी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त किया. पंजाब में 32% दलित आबादी के मद्देनज़र प्रदेश कांग्रेस ने कई वरिष्ठ नेता भी चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत कर रहे थे. कांग्रेस का अंदरूनी सर्वे भी चन्नी के पक्ष में था. लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने काफ़ी सोच विचार के बाद एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का एलान किया. माना जा रहा है इसके पीछे बड़ा कारण यह था कि राजा ने पार्टी को तब संभाला जब बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह पिट गई थी. इसके बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटें जीती थी.
सूत्रों के मुताबिक वेणुगोपाल ने इन नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के साथ यह भी आश्वासन दिया कि चुनाव में सबका ख्याल रखा जाएगा. सूत्रों के मुताबिक बागी नेताओं से वेणुगोपाल ने कहा कि आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर पार्टी बदलाव भी कर सकती है. हालांकि चुनाव में कुछ ही वक्त को देखते हुए अब इसकी गुंजाइश कम ही नज़र आती है.
आने वाले दिनों में राहुल गांधी पंजाब में "बस यात्रा" कर सकते हैं. इसमें सभी नेताओं को साथ लेकर पार्टी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करेगी. हालांकि क्या वाकई पंजाब कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी ये आने वाले दिनों में ही साफ़ हो पाएगा. अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मुख्य मुकाबला सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से है.
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