Success Story: “पापा… डीएसपी सक्षम रिपोर्टिंग!”...बस इतना ही कहा था सक्षम ने, और सामने खड़े पिता ने बिना कुछ कहे अपने बेटे को गले से लगा लिया. उनकी आंखों में सात साल के संघर्ष, अनगिनत असफलताओं, टूटते-बिखरते सपनों और अटूट विश्वास का सैलाब उमड़ पड़ा. सालों से थमा हुआ भावनाओं का बांध आखिर टूट गया और खुशी के आंसू बह निकले. दूसरी ओर मां कुछ बोल तो नहीं पा रही थीं, बस हाथ जोड़कर भगवान का शुक्रिया अदा कर रही थीं. सक्षम की इस भावुक और प्रेरणादायक यात्रा को करीब से जानने के लिए NDTV ने उनसे खास बातचीत की. आइए जानते हैं, संघर्ष से सफलता तक के इस सफर में उन्होंने क्या-क्या चुनौतियां झेलीं.
मंदिर के फर्श से शुरू हुई 'डीएसपी' बनने की कहानी
BPSC का रिजल्ट आने वाले दिन सक्षम किसी कोचिंग सेंटर या दोस्तों के बीच नहीं थे, बल्कि वह एक मंदिर परिसर में बैठे थे. उनका मानना है कि जीवन में जो कुछ होता है, वह ईश्वर की योजना का हिस्सा होता है. वह बताते हैं, “मैं मंदिर में बैठकर ही मेरिट लिस्ट देख रहा था. जैसे ही अपनी पहली पसंद वाली सेवा (DSP) में अपना नाम देखा, मेरे हाथ कांपने लगे. 70वीं BPSC में मेरी ओवरऑल रैंक 230वीं थी, जबकि DSP कैडर में मेरी रैंक 41वीं रही.”
जिसके सपनों में बचपन से थी वर्दी, उसे मिले 8 बड़े झटके
पटना के रहने वाले सक्षम ने अपनी दसवीं की पढ़ाई सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से और बीएससी (स्टैटिस्टिक्स) की पढ़ाई पटना साइंस कॉलेज से की है. स्कूल के दिनों में NCC एयर विंग से जुड़ना उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था, जहां से वर्दी का आकर्षण जुनून में बदल गया.
उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें भारतीय सेना (Army/Navy/Airforce) में अधिकारी बनना है. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने NDA, CDS और AFCAT जैसी कठिन परीक्षाएं पास कीं. लिखित परीक्षा में तो उन्हें हर बार सफलता मिलती रही, लेकिन हर बार SSB इंटरव्यू अंतिम पड़ाव बन गया. एक बार नहीं, दो बार नहीं… सक्षम पूरे आठ बार एसएसबी (SSB) से रिजेक्ट हुए. यह एक ऐसा मोड़ था जो किसी भी युवा को तोड़ सकता था, लेकिन सक्षम हर बार उठ खड़े हुए.

पिता की एक बात ने डूबती हुई हिम्मत को बचा लिया
आठवीं बार SSB में असफल होने के बाद भी उनके पिता मोतीलाल, जो SBI से AGM पद से रिटायर्ड हैं, उन्होंने कभी बेटे पर दबाव नहीं बनाया. सक्षम बताते हैं, “हर असफलता के बाद पापा बस इतना कहते थे- ‘कोई बात नहीं… लगे रहना है.' जब सक्षम ने सेना के बजाय सिविल सर्विसेज (BPSC) की तैयारी करने का फैसला लिया, तब भी पिता ने पूरा भरोसा जताया. उनके पिता हर बार कहते थे कि उम्र या समय की चिंता मत करो, पूरी ईमानदारी से 70वीं और 71वीं BPSC पर ध्यान दो और किसी दूसरे विकल्प की तरफ मत देखो. सक्षम कहते हैं कि अगर पिता का यह भरोसा न होता, तो शायद वह बार-बार खुद पर विश्वास नहीं कर पाते.
घर की 'कमांडिंग ऑफिसर' का अटूट विश्वास
अगर पिता ने हिम्मत दी, तो मां सविता कुमारी ने विश्वास दिया. सक्षम मुस्कुराते हुए कहते हैं, “हमारे घर की असली कमांडिंग ऑफिसर मेरी मां हैं.” मां हमेशा कहती थीं- “मेरा मन नहीं था कि तुम फौज में जाओ, शायद इसलिए वहां चयन नहीं हुआ. लेकिन इस परीक्षा (BPSC) में तुम्हारा चयन होकर रहेगा.” परिणाम वाले दिन मां की आंखों में जो आंसू थे, वे उनके इसी विश्वास की जीत थे.
8 असफलताओं के बाद भी कैसे बचा रहा आत्मविश्वास?
SSB में लगातार आठ बार रिजेक्ट होना किसी भी उम्मीदवार का मोराल डाउन कर सकता है. लेकिन सक्षम ने खुद को बिखरने नहीं दिया. वह कहते हैं, “मैं हमेशा खुद को अपनी पुरानी उपलब्धियां याद दिलाता था. NCC का सफर, बेस्ट कैडेट बनने का गौरव, नेतृत्व की जिम्मेदारियां, ये सब मुझे बताते थे कि मेरी क्षमता खत्म नहीं हुई है.”
सक्षम का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी शिक्षक किताबें नहीं, बल्कि NCC रही. स्कूल में हाउस कैप्टन, कबड्डी टीम के कप्तान, NGO में टीम लीडर, बिहार एयर स्क्वाड्रन में यूनिट सीनियर, ‘बेस्ट कैडेट बिहार-झारखंड 2022', नेपाल में भारत के NCC यूथ एंबेसडर के रूप में देश का प्रतिनिधित्व और देश के पूर्व उपराष्ट्रपति व पूर्व वायुसेना प्रमुख से मुलाकात... इन सभी अनुभवों ने उनके व्यक्तित्व को फौलाद बना दिया था. यही वजह रही कि BPSC इंटरव्यू के समय उन्हें बिल्कुल घबराहट नहीं हुई.

बिना किसी महंगी कोचिंग के, घर से ही की ऑनलाइन तैयारी
आज जब ज्यादातर अभ्यर्थी कई कोचिंग संस्थानों और दर्जनों सोर्सेज के पीछे भागते हैं, सक्षम ने पूरी तैयारी अपने घर पर रहकर की. उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद ली और अपने पुराने नोट्स का इस्तेमाल किया. BPSC में उनका वैकल्पिक विषय (Optional Subject) भूगोल (Geography) था, जिसकी तैयारी भी उन्होंने खुद ही की थी. उनके लिए पढ़ाई का मतलब घंटे गिनना नहीं था. वह कभी यह नहीं देखते थे कि 6 घंटे पढ़ा या 8 घंटे, उनका लक्ष्य सिर्फ इतना होता था कि आज का तय किया गया डेली टारगेट पूरा होना चाहिए. औसतन वह 5 से 7 घंटे पढ़ते थे, लेकिन पूरी निरंतरता के साथ.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी, दीवारों को बनाया प्रेरणा
सक्षम का मानना है कि आज की तारीख में सबसे बड़ा खतरा जानकारी की कमी नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा जानकारी है. उन्होंने तैयारी के दौरान अपने सारे सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद कर दिए थे. पढ़ाई के समय मोबाइल फोन कमरे से बाहर रहता था. इसके अलावा, तनाव और आत्म-संदेह से लड़ने के लिए सक्षम ने अपने कमरे की दीवारों पर प्रेरणादायक कोट्स, NCC के दिनों की तस्वीरें और अपनी उपलब्धियों के सर्टिफिकेट लगा दिए थे. हर सुबह उन तस्वीरों को देखकर उन्हें याद आता था कि उन्होंने जीवन में पहले भी कठिन लड़ाइयां जीती हैं और यह लड़ाई भी वो जीत सकते हैं.

मेंस परीक्षा से ठीक पहले दादा जी का साया उठा
बातचीत के दौरान जब दादाजी का जिक्र आया, तो सक्षम भावुक हो गए. फरवरी 2025 में, मेंस परीक्षा से महज दो महीने पहले, उनके दादाजी का निधन हो गया था. एक ओर परीक्षा का भारी दबाव था, तो दूसरी ओर परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य को खोने का दर्द. सक्षम कहते हैं, “मुझे हमेशा लगता है कि मैं थोड़ा देर से सफल हुआ. काश, दादा जी आज होते... उन्हें मुझ पर बहुत गर्व होता. मैं अपनी यह सफलता उन्हें ही समर्पित करता हूं.”
BPSC एस्पिरेंट्स के लिए सक्षम का सक्सेस मंत्र
सक्षम का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होतीं. उनके शब्दों में, “लगभग सभी अभ्यर्थी पढ़ रहे होते हैं. फर्क वहां पड़ता है, जहां किसी को अपनी रणनीति, अपने निर्णय और खुद पर विश्वास होता है.” उनके अनुसार BPSC अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी गलती FOMO यानी दूसरों की देखा-देखी अपनी रणनीति बदलना है. वह सलाह देते हैं कि अपने सोर्सेज सीमित रखिए, उसी पर भरोसा रखिए और लगातार रिवीजन कीजिए. हर अभ्यर्थी की क्षमता अलग होती है, इसलिए किसी और की हूबहू नकल न करें.
अब अगला सपना: वर्दी की गरिमा और समाज सेवा
अगस्त महीने से सक्षम की ट्रेनिंग शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद वह बतौर DSP पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं देंगे. इस सफलता के बाद सक्षम कहते हैं, “अब मेरी सबसे बड़ी इच्छा है कि वर्दी की गरिमा बनाए रखते हुए पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और अपने सिद्धांतों के साथ समाज की सेवा करूं.”
जब अंत में हमने सक्षम से तैयारी कर रहे अन्य छात्रों के लिए कुछ कहने को कहा, तो उन्होंने चलते-चलते एक बेहद खूबसूरत बात कही- “ऊपर की चोटी बहुत खूबसूरत है दोस्त… बस चढ़ाई मत छोड़ना.”
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