प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में प्रचारक थे, तब लक्ष्मणराव इनामदार उनके सबसे बड़े मार्गदर्शक और मेंटर माने जाते थे. जब भी मोदी किसी परेशानी या दुविधा में होते, तो उनसे खुलकर बात करते थे. लक्ष्मणराव इनामदार गुजरात में संघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे. पहले वे वकील थे, लेकिन बाद में उन्होंने संघ का प्रचारक बनकर गांव-गांव काम किया.
1960 के दशक में वडनगर में नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात लक्ष्मणराव इनामदार से हुई थी. उनकी सादगी, व्यक्तित्व और भाषणों से प्रभावित होकर मोदी संघ से जुड़े. राजनीति और संगठन का पाठ भी उन्होंने उनसे ही सीखा. मोदी अक्सर अपने सुख-दुख और मन की बातें उनके साथ साझा करते थे. एक इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि लक्ष्मणराव के निधन के बाद हालात बदल गए और अब उनकी सोचने की प्रक्रिया 'ऑटो-पायलट सिस्टम' पर चलती है.
मां हीराबा थीं भावनात्मक सहारा
प्रधानमंत्री मोदी ने कम उम्र में घर-परिवार छोड़ दिया था, लेकिन अपनी मां हीराबा से उनका गहरा लगाव हमेशा बना रहा. बताया जाता है कि 17 साल की उम्र में जब वे दो साल के लिए घर से निकले, तब भी अपने झोले में मां की एक तस्वीर साथ रखते थे.
मोदी हर साल अपने जन्मदिन पर मां का आशीर्वाद लेने जाते थे. प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जब कभी गुजरात जाते, तो मां से मिलने जरूर पहुंचते थे. उनके साथ समय बिताते, खाना खाते और जीवन की कई बातें साझा करते थे. साल 2022 में 100 वर्ष की आयु में हीराबा का निधन हो गया.
डायरी में दर्ज करते हैं मन की बातें
प्रधानमंत्री मोदी को बचपन से ही डायरी लिखने की आदत है. वे अपने विचारों, अनुभवों और मन के भावों को डायरी में लिखते रहे हैं. कहा जाता है कि जब वे अपनी निजी बातें या भावनाएं किसी से साझा नहीं कर पाते, तो उन्हें डायरी के पन्नों पर उतार देते हैं. उनकी डायरी पर आधारित किताब 'साक्षी भाव' भी प्रकाशित हो चुकी है. इस तरह डायरी भी उनके लिए अपने मन की बात कहने का एक अहम माध्यम रही है.
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