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This Article is From Aug 15, 2025

पीएम मोदी ने अमेरिका से मुकाबले के लिए 'चीन' से आगे का फॉर्म्युला दिया

पीएम मोदी ने कॉम्प्रिहेंसिव और इंटीग्रेटेड विकास की राह अपनाने की बात कही, ताकि भारत वैश्विक बाजार में अपनी पहचान को और मजबूत कर सके.

पीएम मोदी ने उत्पादन क्षेत्र को दिया बड़ा मैसेज
  • PM मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर एमएसएमई की ताकत और उत्पादन क्षेत्र में 'दाम कम, दम ज्यादा' का मंत्र दिया.
  • मोदी ने वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता बढ़ाकर भारत को अमेरिका और चीन से प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने की बात कही.
  • उन्होंने नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन और कॉम्प्रिहेंसिव विकास की दिशा में तेजी से काम करने पर जोर दिया.
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नई दिल्ली:

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. इस खास मौके पर पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की ताकत पर जोर दिया और भारत में उत्पादन के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए 'दाम कम, दम ज्यादा' का मूल मंत्र दिया.पीएम मोदी ने भारत को वैश्विक स्तर पर क्वालिटी के मामले में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपील की. पीएम मोदी की ये अपील एक तीर से दो शिकार करने जैसा है. जहां पीएम मोदी ने एक तरफ ये कहकर अमेरिका से मुकाबले के लिए अपनी तैयारियों की ओर इशारा कर दिया वहीं दूसरी तरफ ऐसा कहकर उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि अब देश में ही सस्ते और बेहतर उत्पाद बनाकर भारत चीन को विश्व बाजार से बाहर करने की तैयारी कर चुका है. 

उन्होंने एमएसएमई से उत्पादन की लागत को कम करने और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देने की अपील करते हुए कहा कि आज दुनिया गुणवत्ता की मांग करती है. हमें ऐसा उत्पाद बनाना है, जिसमें दाम कम हो, लेकिन दम ज्यादा हो. हम सभी जो उत्पादन के क्षेत्र में लगे हैं, उन सभी का मंत्र होना चाहिए कि 'दाम कम, दम ज्यादा'. इस भाव के साथ हमें आगे बढ़ना है.

पीएम मोदी ने कॉम्प्रिहेंसिव और इंटीग्रेटेड विकास की राह अपनाने की बात कही, ताकि भारत वैश्विक बाजार में अपनी पहचान को और मजबूत कर सके. उन्होंने कहा कि देश में नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन पर बहुत तेजी से काम हो रहा है. हमारे एमएसएमई का लोहा दुनिया मानती है. दुनिया में जो बड़ी-बड़ी चीजें बनती हैं, उनके औजार हमारे एमएसएमई के द्वारा बहुत गर्व के साथ जाते हैं. हम कॉम्प्रिहेंसिव और इंटीग्रेटेड विकास की राह पर जाना चाहते हैं. 

विश्व बाजार में भारतीय उत्पादन का लोहा मनवाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी लाल किले से जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट की बात कही थी. हमें विश्व बाजार में अपने सामर्थ्य का लोहा मनवाना है, तो गुणवत्ता में लगातार नई ऊंचाइयों को पार करना है. दुनिया क्वालिटी को स्वीकार करती है. इसमें सरकार के भी प्रयास हों, रॉ मटेरियल की उपलब्धि हो, और हमारे प्रोडक्शन की कॉस्ट कम हो. इससे पहले अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को दोहराया. उन्होंने आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को हर क्षेत्र में अग्रणी बनाना है.

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