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संविधान विशेषज्ञ और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर पीएम मोदी जताया दुख

देश के प्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष सी. कश्यप का गुरुवार को 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

संविधान विशेषज्ञ और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर पीएम मोदी जताया दुख
सुभाष सी. कश्यप
  • संविधान विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हुआ.
  • डॉ. कश्यप ने लोकसभा सचिवालय में 1953 से 1990 तक लगभग 37 वर्षों तक सेवा प्रदान की थी.
  • वे भारतीय संविधान, संसदीय व्यवस्था और संवैधानिक कानून के क्षेत्र में गहन अध्ययन एवं शोध के लिए विख्यात थे.

मशहूर संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप का बृहस्पतिवार को निधन हो गया. वह 97 वर्ष के थे. लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि कश्यप का निधन सुबह करीब 10 बजे दिल्ली स्थित उनके आवास पर हृदय गति रुक जाने के कारण हुआ. वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ भी थे. PM मोदी और  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कश्यप के निधन पर दुख जताया है.

PM मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा,  'लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से गहरा दुःख हुआ है. वे भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान हमारे समाज के लिए समृद्ध साबित हुआ. लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रति उनका लेखन और समर्पण सराहनीय था. उनके परिवार और मित्रों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं. ओम शांति.'

उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : बिरला

बिरला ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप जी का निधन अत्यंत दुःखद है. डॉ. कश्यप भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे. लोकसभा के महासचिव के रूप में उनकी दीर्घ और विशिष्ट सेवाएं, संवैधानिक विषयों पर उनका गहन अध्ययन तथा उनकी सौ से अधिक पुस्तकों ने देश की कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान किया.''

उन्होंने कहा कि संसद, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणाओं से निर्मित उनका जीवन राष्ट्रसेवा, ज्ञान और नैतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण था. चाहे संसदीय प्रक्रियाओं का विकास हो, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का कार्य हो या संवैधानिक सुधारों पर विचार-विमर्श, डॉ. कश्यप ने हर भूमिका में अपनी विद्वता और दूरदृष्टि की अमिट छाप छोड़ी. अपनी इस विद्वता के चलते उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित किया गया.''

बिरला का कहना है कि उनका देहावसान भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए गहरी क्षति है. उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें.''

सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे.

कश्यप 1984 से 1990 तक सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे. वह एक प्रख्यात राजनीतिक वैज्ञानिक, भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून, संसदीय मामलों के विशेषज्ञ थे. उनका जन्म 10 मई 1929 को हुआ था. पत्रकारिता से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने वाले कश्यप कुछ समय के लिए वकील और शिक्षक भी रहे. वह 1953 में लोकसभा सचिवालय के साथ जुड़े और 37 वर्षों तक सेवा दी.

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