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देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान

Petrol Diesel Prices: पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनियों को लगभग हर दिन 700-1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. महीने के अनुसार देखें तो करीब 30,000 करोड़ रुपए. ऐसे में अब भारत में भी पेट्रोल, डीजल की कीमत बढ़ने की संभावना है. 

देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान
पश्चिम एशिया तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब भारत पर पड़ने की आशंका है.
  • पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं.
  • भारत की सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर रोजाना 700 से 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
  • भारत के तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को हर महीने लगभग तीस हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है.
नई दिल्ली:

Petrol Diesel Price Hike: ईरान, इजरायल-अमेरिका युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई. पश्चिम एशिया में शुरू हुए इस युद्ध के बाद जापान से लेकर यूनाइटेड किंगडम तक के देशों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं. लेकिन भारत में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है. लेकिन कीमत नहीं बढ़ाने से भारत की सरकारी तेल कंपनियों को लगातार बड़ा नुकसान हो रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.

हर महीने हो रहा 30 हजार करोड़ का नुकसान

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार भारत की सरकारी तेल कंपनियों को लगभग हर दिन 700-1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. महीने के अनुसार देखें तो करीब 30,000 करोड़ रुपए. ऐसे में अब भारत में भी पेट्रोल, डीजल की कीमत बढ़ने की संभावना है. 

मिडिल ईस्ट जंग के कारण चरमराई आपूर्ति

मिडिल ईस्ट की लड़ाई के कारण भारत के 40 प्रतिशत कच्चे तेल (पेट्रोल और डीजल बनाने का कच्चा माल), 90 प्रतिशत कुकिंग गैस (LPG) और 65 प्रतिशत नैचुरल गैस (जिसका इस्तेमाल बिजली बनाने, खाद बनाने, CNG में बदलने और घरों की रसोई तक पाइप से पहुंचाने में होता है) के आयात में रुकावट आई. लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले 10 हफ्तों में एक भी बार बिना किसी रोक-टोक या कमी के लगातार ईंधन की सप्लाई बनाए रखी है.

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तेल कंपनियों को हर महीने हो रहा 30 हजार करोड़ का नुकसान

लेकिन इसकी बड़ी कीमत भारत की प्रमुख तीन तेल मार्केटिंग कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को चुकानी पड़ी. इन कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी या नुकसान हो रहा है. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी.

सूत्रों ने बताया कि अप्रैल के दौरान रोजाना की अंडर-रिकवरी पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 25 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान था, जिसका मतलब है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को रोज़ाना औसतन 700-1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था.

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक प्रेस ब्रीफिंग में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमतें अस्थिर रही हैं और आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 88 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से पूरा करता है.

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70 डॉलर प्रति बैरल से 120 डॉलर तक पहुंची कच्चे तेल की कीमत

उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें जो दो महीने पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, अब 120 डॉलर पर पहुंच गई हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने कहा, "सरकार की अब तक यही कोशिश रही है कि कीमतें स्थिर रहें और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कोई बढ़ोतरी न हो." इससे तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के वित्त पर बुरा असर पड़ा है... मासिक घाटा (under-recoveries) लगभग 30,000 करोड़ रुपये का है.

उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतें इसी स्तर पर बनी रहेंगी. उन्होंने कहा, "जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, अब तक हमारी यही कोशिश रही है कि कीमतों में कोई बढ़ोतरी न हो."

एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सरकार ने अंडर रिकवरी रोकी

सरकार के दखल में एक्साइज ड्यूटी में कटौती और ईंधन की लागत के बोझ का कुछ हिस्सा खुद उठाना शामिल था. पेट्रोल पर लगने वाली खास अतिरिक्त एक्साइज़ ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया, जबकि डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी को 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया.

अगर सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती न की होती, तो अंडर-रिकवरी बढ़कर लगभग 62,500 करोड़ रुपये हो गई होती. शर्मा ने कहा कि एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती करने से सरकार को हर महीने 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.

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मिडिल ईस्ट जंग के कारण कहां कितनी बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत

मिडिल ईस्ट जंग के कारण दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ी है. स्पेन में पेट्रोल की कीमतें लगभग 34 प्रतिशत, जापान, इटली और इज़राइल में 30 प्रतिशत, जर्मनी में 27 प्रतिशत और यूनाइटेड किंगडम में 22 प्रतिशत बढ़ गईं. कई देशों ने राशनिंग, एनर्जी बचाने की सलाह, आपातकालीन राहत पैकेज या ईंधन की कीमतों पर ऊपरी सीमा भी लागू की.

उन्होंने आगे कहा कि भारत में पेट्रोल की कीमतें 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमतें 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहीं, और यहां न तो राशनिंग हुई, न ही आने-जाने पर कोई रोक लगी और न ही सप्लाई में कोई रुकावट आई. लेकिन अब भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की आशंका है. 

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