पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. भारत की सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर रोजाना 700 से 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. भारत के तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को हर महीने लगभग तीस हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है.