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नेहरू-इंदिरा और कांग्रेस के लिए देश की जनता समस्या- PM मोदी ने सुनाई ये कहानी

प्रधानमंत्री ने संसद में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके लिए देशवासी समस्या नहीं, समाधान हैं. पीएम ने नेहरू, इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कहानी सुनाई कि कैसे उनके लिए देश की जनता समस्या थी.

नेहरू-इंदिरा और कांग्रेस के लिए देश की जनता समस्या- PM मोदी ने सुनाई ये कहानी
  • संसद में पीएम मोदी बोले- कांग्रेस देशवासियों को समस्या मानती रही, हम उन्हें समाधान मानते हैं.
  • पीएम ने इंदिरा, नेहरू से जुड़ी एक कहानी सुनाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान पर विपक्ष को घेरा.
  • पीएम बोले देश के नौजवानों के संकल्प उनके सपने के लिए हम जीते हैं, उनके लिए सरकार चलाते हैं.
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संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री ने गुरुवार को कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक और वैचारिक हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके पुराने नेतृत्व की सोच भारत के नागरिकों को समस्या मानने वाली रही है, जबकि उनकी सरकार देश के लोगों को 140 करोड़ समाधान मानती है.

प्रधानमंत्री ने गुजरात से असम तक देश के बदलते मिजाज और राजनीति की दिशा का जिक्र करते हुए एक पुराना किस्सा सुनाया. 

पीएम मोदी ने कहा, "इंदिरा जी एक बार ईरान गई थीं तब वहां वो एक भाषण दे रही थीं. तब उस भाषण में इंदिरा जी, नेहरू जी के साथ बातचीत का उल्लेख कर रही थीं. वो बता रही थीं कि 'जब किसी ने मेरे पिता जी (नेहरू जी) से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं तो उन्होंने उत्तर दिया था 35 करोड़.'

पीएम बोले- नेहरू जी को देशवासी समस्या लगते थे

प्रधानमंत्री मोदी बोले कि तब हमारे देश की जनसंख्या थी 35 करोड़. 35 करोड़ देशवासी नेहरू जी को समस्या लगते थे. क्या ऐसा कोई मुखिया हो सकता है जिसे देश की जनता समस्या लगे? तब इंदिरा गांधी ने ये भी कहा था कि 'आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है. इसलिए मेरी समस्याओं की संख्या भी उतनी ही बड़ी है.' 

पीएम मोदी बोले, "ये फर्क है उनके काम और हमारे काम में. नेहरू जी हों या इंदिरा जी, या पूरी कांग्रेस बिरादरी हो. ये लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं. मैंने दुनिया के सामने और देश के सामने कहा कि चुनौतिया चाहे कितनी भी क्यों न हों हमारे पास 140 करोड़ समाधान हैं. हमारे देशवासी हमारे कर्ताधर्ता हैं. ये सोच वाले लोग अपने परिवार का ही भला करेंगे. देश के लोगों का अपमान करना कांग्रेस के स्वभाव, संस्कार में पड़ा हुआ है."

"बीते दिनों राष्ट्रपति जी का अपमान किया, चुनाव के बाद जिस प्रकार से हमारे राष्ट्रपति जी के लिए शब्द कहे गए. शर्मिंदगी महसूस होती है कि ये कैसे लोग हैं, भारत के राष्ट्रपति के लिए कैसे  शब्द बोल रहे हैं. कल लोकसभा में भी राष्ट्रपति जी के संबोधन पर चर्चा नहीं हो पाई. गरीबी से निकली हुई एक महिला, आदिवासी परिवार से आई हुई एक महिला, आपने आदिवासी समाज, महिला, सर्वोच्च पद पर विराजमान महिला का अपमान किया है, आपने संविधान का अपमान किया है."

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राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के अपमान पर तीखा हमला

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर परिवारवाद और सत्ता-केंद्रित राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि “जो लोग देश के लोगों को समस्या मानते हैं, वे सिर्फ अपने परिवार का भला कर सकते हैं, देश का नहीं.” उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति में जनता का अपमान करना शामिल रहा है.

पीएम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर हालिया विवादों का भी जिक्र किया और विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद जिस तरह राष्ट्रपति के खिलाफ शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वह न सिर्फ एक संवैधानिक पद का अपमान है, बल्कि एक आदिवासी पृष्ठभूमि से आई महिला का भी अपमान है. 

प्रधानमंत्री ने कहा,  “गरीबी से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंची महिला का अपमान, संविधान का अपमान है.” 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा न होने देना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है. पीएम बोले, “राष्ट्रपति देश की आवाज होती हैं. उनके संबोधन पर चर्चा न करना संसद और संविधान दोनों का अपमान है.”

प्रधानमंत्री का यह भाषण ऐसे समय आया है जब संसद का सत्र गरमाया हुआ है और आगामी राजनीतिक लड़ाइयों की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. उनके बयान को कांग्रेस बनाम बीजेपी की वैचारिक लड़ाई के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक ओर ‘जनता ही शक्ति' का नैरेटिव है तो दूसरी ओर विपक्ष पर ‘जनता-विरोधी सोच' का आरोप. संसद के भीतर दिए गए इस भाषण ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रहने की संभावना है.

अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी बोले 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट है. देश के नौजवानों के संकल्प उनके सपने के लिए हम जीते हैं, उनके लिए सरकार चलाते हैं, सत्ता हमारे लिए सुख नहीं सेवा का माध्यम है.

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