- 3 जनवरी की रात वुल्फ सुपरमून देखा जाएगा जो सामान्य पूर्णिमा से बड़ा और अधिक चमकीला होगा.
- सुपरमून तब बनता है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पेरिजी के आसपास होता है.
- इसे नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है और दूरबीन या कैमरे से बेहतर तस्वीरें ली जा सकती हैं.
नए साल का पहला 'सुपरमून' आसमान में दिखाई दे गया है. इसे वुल्फ मून भी कहा जाता है. दिल्ली, यूपी, रांची, कोलकाता, ओडिशा, गुवाहाटी समेत तमाम जगहों पर सुपरमून दिखाई दिया. इस खास खगोलीय नजरा नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है. ये साल 2026 का पहला 'सुपरमून' है. 3 जनवरी की रातभर वुल्फ सुपरमून आसमान में देखा जा सकता है. आमतौर पर दिखने वाले चंद्रमा की तुलना में पूर्णिमा की रात दिखने वाला चंद्रा थोड़ा बड़ा और ज्यादा चमकदार है. फुलमून देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है. पूर्णिमा का चांद बहुत खास होता है, ना ये सिर्फ फुल मून होता है बल्कि एकदम चमकीला और बड़ा भी नजर आता है. इस खगोलीय घटना के दौरान, चांद एक आम पूर्णिमा के चांद से 30% ज़्यादा चमकदार दिखाई दे रहा है.
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#WATCH | झारखंड: रांची में 2026 का पहला 'सुपरमून' देखा गया, इसे 'वुल्फ मून' के नाम से भी जाना जाता है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 3, 2026
इस खगोलीय घटना के दौरान, चांद एक आम पूर्णिमा के चांद से 30% ज़्यादा चमकदार दिखेगा। pic.twitter.com/EQvLLhtYjX
कब बनता है सुपरमून?
जब पूर्णिमा का चंद्रमा धरती के सबसे नजदीकी बिंदु पेरिजी के आसपास होता है, तब सुपरमून बनता है. दरअसल चंद्रमा का ओरबिट गोल नहीं बल्कि अंडाकार होता है. इसी वजह से उसकी दूसरी धरती से बदलती रहती है. चांद जब धरती के करीब होता है, तब वह देखने में बड़ा और ज्यादा चमकीला दिखाई देता है. 3 जनवरी,शनिवार की रात चंद्रमा धरती से करीब 3 लाख 62 हजार किमी. की दूरी पर होगा. इस वजह से यह नॉर्ल डेज में दिखने वाले चांद की तुलना में करीब 6 से 14 प्रतिशत बड़ा और 13 से 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिख सकता है. अंतर भले ही आंखों से पता न चले लेकिन चांद की चमक जरूर महसूस कीजा सकेगी.
#WATCH | पश्चिम बंगाल: कोलकाता में 2026 का पहला 'सुपरमून' देखा गया, इसे 'वुल्फ मून' के नाम से भी जाना जाता है।
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इस खगोलीय घटना के दौरान, चांद एक आम पूर्णिमा के चांद से 30% ज़्यादा चमकदार दिखेगा। pic.twitter.com/LwcstU2D9o
वुल्फ सुपरमून भारत में कब और कैसे दिखेगा ?
3 जनवरी की शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद वुल्फ सुपरमून दिखना शुरू हो जाएगा. क्षितिज के पास होने की वजह से चंद्रमा हल्का पीला या नारंगी रंग का दिख सकता है. हालांकि देखने में यह बहुत ही खूबसूरत लगता है. इसे पूरी रात आसमान में देखा जा सकता है.
#WATCH | उत्तर प्रदेश: लखनऊ में 2026 का पहला 'सुपरमून' देखा गया, इसे 'वुल्फ मून' के नाम से भी जाना जाता है।
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कैसे देखा जा सकेगा वुल्फ सुपरमून?
वुल्फ सुपरमून को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं है. इसे नंगी आंखों से आसानी से देख सकते हैं. कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप से इसकी तस्वीरें और भी अच्छी तरह कैद हो पाएंगी.
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