नई दिल्ली:
संसद की स्थाई समिति ने लोकपाल विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाने का फैसला संसद पर छोड़ा है। समिति में कांग्रेस के सदस्यों ने असहमति नोट देते हुए समूह सी के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी लोकपाल के दायरे में शामिल करने की मांग की है। भाजपा, बीजद और वामदल के सदस्यों ने असहमति नोट देते हुए प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में कुछ एहतियातों के साथ शामिल करने की मांग की है। कांग्रेस के तीन सदस्यों दीपा दासमुंशी, पी टी थॉमस और मीनाक्षी नटराजन ने आज समिति की अंतिम बैठक में समूह सी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग करते हुए असहमति नोट दिये। समिति की अंतिम रिपोर्ट से समूह सी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री के मुद्दे पर तीन विकल्प भी सुझाए गए हैं। इनमें बिना छूट के उन्हें शामिल करना, पद छोड़ने के बाद शामिल करना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश मामले जैसे मुद्दों को छोड़कर प्रधानमंत्री को इसके दायरे में शामिल करना हैं। समझा जाता है कि समिति के समक्ष भाजपा, बीजद, सपा, कांग्रेस, लोजपा, राजद और वाम दलों के सदस्यों की ओर से कुल 16 असहमति नोट दिये गये हैं। कानून एवं न्याय पर संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने बैठक के बाद कहा कि रिपोर्ट संसद में नौ दिसंबर को रखी जा सकती है। सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया है कि संसद के शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक को पारित किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि अगर रिपोर्ट नौ दिसंबर को संसद में पेश की जाती है तो सरकारी संशोधनों के साथ एक नया विधेयक लोकसभा के विचारार्थ 19 दिसंबर को रखा जा सकता है और यह 21 दिसंबर को राज्यसभा पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समिति में कांग्रेस के सदस्यों ने केवल अपने विचार रखे हैं और असहमति नोट नहीं दिये। सपा, राजद और लोजपा के सदस्यों ने अपने असहमति नोट में लोकपाल में सभी स्तरों पर अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने की मांग की है। सपा के लोकसभा सदस्य शैलेंद्र कुमार ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, जांच समिति में आरक्षण पर्याप्त नहीं है। लोकपाल के चयन के बाद इसकी भूमिका समाप्त हो जाएगी। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि उन्होंने अपने असहमति नोट में लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का विरोध किया है। भाजपा के सात सदस्यों ने प्रधानमंत्री को कुछ एहतियातों के साथ शामिल करने, निचली नौकरशाही को शामिल करने और नागरिक संहिता व शिकायत निपटारा प्रणाली को लोकपाल का हिस्सा बनाने की मांग करते हुए असहमति नोट दिये हैं। माकपा का कहना है कि वह प्रधानमंत्री और निचली नौकरशाही को लोकपाल के दायरे में लाना चाहती है, वहीं आरएसपी ने कहा कि प्रधानमंत्री को बिना एहतियातों के लोकपाल के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। सिंघवी ने कहा, समिति ने अनेक विषयों को मिलाते हुए 25 मुद्दों पर विचार विमर्श किया और अलग अलग मुद्दों पर अलग अलग सदस्यों की ओर से कुछ विरोध थे। उन्होंने कहा कि संसद में पेश होने वाली रिपोर्ट में असहमति नोट झलकेंगे।
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
संसद, समिति, लोकपाल, बिल, रिपोर्ट, Parliament, Lokpal Bill, Committee