- JNU के 11 स्टूडेंट्स ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है.
- आरोप है कि प्रोफेसर ने वाइवा में गंदे कमेंट्स किए और एक्स्ट्रा मार्क्स के बदले यौन संबंध की मांग की.
- यह भी आरोप हैं कि प्रोफेसर ने अपने घर पार्टी में बुलाकर दुर्व्यवहार किया.
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के 11 स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी की 'इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी' (ICC) में एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की है. NDTV को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है. इन आरोपों में गंदे कमेंट्स करना और यौन संबंध बनाने के बदले एक्स्ट्रा मार्क्स देने की पेशकश करना शामिल है. यह शिकायत मई में ICC को सौंपी गई थी, जब कई स्टूडेंट्स ने प्रोफेसर के खिलाफ आरोप लगाए थे. इसके बाद कमेटी ने अपनी कार्यवाही शुरू की और छात्रों से बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने को कहा.
सूत्रों के मुताबिक, प्रोफेसर ने कथित तौर पर वाइवा के दौरान यौन-इशारे वाली बातें कहीं और सुझाव दिया कि अगर छात्राएं उनकी मांगों को मान लें, तो उन्हें ज्यादा नंबर मिल सकते हैं.
छात्राओं का क्या कहना है?
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने NDTV को बताया, "स्टूडेंट्स का कहना है कि ये घटनाएं तब सामने आईं, जब एक छात्रा ने वाइवा के दौरान अपने एक्सपीरिएंस के बारे में बताया. इसके बाद कई अन्य छात्राओं ने भी ऐसी ही बातें कही. एक आरोप यह भी है कि प्रोफेसर ने एक्स्ट्रा नंबर देने को इस बात से जोड़ दिया कि क्या छात्राएं उनकी अनुचित मांगों को मानती हैं या नहीं."
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आरोप सिर्फ वाइवा एग्जाम तक ही सीमित नहीं हैं. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने उन्हें जेएनयू कैंपस में अपने घर पर होने वाली पार्टियों में बुलाया, जहां उन्होंने कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार की कोशिश की. कुछ शिकायतों में उन पर क्लास के दौरान अश्लील या अनुचित टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है.
शिकायत दर्ज होने के कुछ ही वक्त बाद यूनिवर्सिटी में करीब 45 दिनों का सेमेस्टर ब्रेक हो गया. एक सूत्र ने बताया कि जब स्टूडेंट्स वापस लौटे और जुलाई में क्लास फिर से शुरू हुईं, तो यह मुद्दा एक बार फिर कैंपस में चर्चा का विषय बन गया.
प्रोफेसर के खिलाफ एक और शिकायत के बाद, सीनियर छात्रों सहित कई और छात्र भी ऐसे ही आरोप लेकर सामने आए. ICC ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि यह शिकायत एक अंदरूनी मामला है और इसकी जांच चल रही है. जेएनयू प्रशासन ने भी इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
पहले भी सामने आए हैं मामले...
यह मामला तब सामने आया है, जब जेएनयू ने एक सीनियर फैकल्टी सदस्य से जुड़े यौन उत्पीड़न के एक और मामले में कार्रवाई की थी. पिछले साल अप्रैल में, यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने अलग-अलग मामलों में चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था. इनमें यौन उत्पीड़न के आरोपी एक फैकल्टी सदस्य भी शामिल थे. इस फैकल्टी सदस्य की पहचान स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के तौर पर हुई थी. उस वक्त मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के मुताबिक, उन्हें जापान दूतावास के एक जापानी अधिकारी से जुड़े आरोपों के कारण नौकरी से निकाला गया था.
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