- अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े नए खतरों को उजागर किया है.
- इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के गुप्त परमाणु प्रसार के लंबे इतिहास और खतरे पर अपनी चिंता व्यक्त की है.
- रिपोर्ट में चीन, रूस, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान की मिसाइल प्रणालियों के विकास का उल्लेख किया गया है.
अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े नए खतरों को उजागर किया गया है. इसे लेकर के भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान के 'गुप्त' परमाणु प्रसार के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा कि पाकिस्तान का गुप्त परमाणु प्रसार का लंबा इतिहास रहा है. भारत की यह टिप्पणी अमेरिकी उस खुफिया रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें पाकिस्तान को उन कुछ देशों में से एक बताया गया है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के पेलोड ले जाने में सक्षम उन्नत मिसाइल प्रणालियों का विकास कर रहे हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में कहा कि जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, उसका गुप्त परमाणु प्रसार का एक लंबा इतिहास रहा है.
गुप्त परमाणु अभियान को बताया खतरा
जायसवाल ने पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर रिपोर्ट में उठाई गई चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बयान एक बार फिर दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर देते हैं कि वे किस प्रकार का खतरा पैदा करते हैं और उनके गुप्त परमाणु अभियान किस प्रकार के खतरे उत्पन्न करते हैं.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में विशेष रूप से पाकिस्तान की मिसाइल प्रणाली का उल्लेख किया गया. साथ ही कहा गया कि चीन, रूस, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु और पारंपरिक पेलोड से लैस कई तरह की नवीन, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल वितरण प्रणालियों पर शोध और विकास कर रहे हैं.
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मिसाइल कार्यक्रम को लेकर गबार्ड की चेतावनी
अमेरिकी खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने गुरुवार को चेतावनी दी कि पाकिस्तान का लंबी दूरी का बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भविष्य में अमेरिका के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता “संभावित रूप से ऐसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) तक विकसित हो सकती है, जिनकी मारक क्षमता अमेरिकी मुख्यभूमि तक पहुंचने की हो.” गबार्ड यह टिप्पणी 2026 की वार्षिक खतरा आकलन रिपोर्ट पेश करते हुए हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के सामने कर रही थीं.
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर मिसाइल खतरों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. खुफिया एजेंसियों के अनुसार, 2035 तक दुनिया में मिसाइलों की संख्या मौजूदा 3,000 से बढ़कर 16,000 से अधिक हो सकती है.
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