विज्ञापन

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ : तीनों सेनाओं के संयुक्त कमांडर्स का सम्मेलन, रक्षा मंत्री होंगे शामिल

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता इसलिए जरूरी है, ताकि देश एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर सके. सम्मेलन के दौरान रक्षा बलों द्वारा विकसित अत्याधुनिक और भविष्य की तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. साथ ही, भविष्य के युद्ध से जुड़े नए सिद्धांतों और परिचालन रणनीतियों से संबंधित दस्तावेज जारी किए जाएंगे.

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ : तीनों सेनाओं के संयुक्त कमांडर्स का सम्मेलन, रक्षा मंत्री होंगे शामिल
  • तीनों सेनाओं के कमांडर्स का संयुक्त सम्मेलन जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित किया जा रहा है.
  • सम्मेलन में आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति, तकनीक आधारित चुनौतियां और नए सैन्य आयामों पर गहन चर्चा होगी.
  • रक्षा मंत्रालय ने AI, साइबर और अंतरिक्ष युद्ध जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने का संकेत दिया है

भारत की तीनों सेनाओं, यानी भारतीय वायुसेना, नौसेना व थलसेना के कमांडर्स का संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. यह सम्मेलन इसलिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर 7 मई को आयोजित किया जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7-8 मई को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले इस संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन में शामिल होंगे. सैन्य कमांडर्स यहां ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद की मौजूदा स्थिति पर जानकारी भी देंगे.

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सैन्य क्षमता का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सटीक और निर्णायक कार्रवाई देखने को मिली थी. यह कमांडर्स सम्मेलन ‘नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता' विषय पर आधारित है. यहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारी आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और भविष्य की चुनौतियों पर फोकस करेंगे. यहां आधुनिक युद्ध के नए आयामों पर मंथन होगा. सम्मेलन में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर गहन चर्चा होगी.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आज का युद्ध पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर तकनीक आधारित और अधिक जटिल हो गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानव रहित प्रणालियों (अनमैन्ड सिस्टम्स) और साइबर, अंतरिक्ष तथा संज्ञानात्मक युद्ध जैसे नए क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों पर यहां विशेष ध्यान दिया जाएगा. इस मंच के माध्यम से इन नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता विकास, रणनीति निर्माण और भविष्य के लिए सक्षम तथा सुदृढ़ सैन्य बल तैयार करने की रूपरेखा तय की जाएगी.

सैन्य तैयारियों के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण पर जोर दिया जाएगा. सम्मेलन के एजेंडे में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को गति देना प्रमुख रहेगा. इसके तहत नवाचार को बढ़ावा देने, घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और सिविल-मिलिट्री तालमेल को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता इसलिए जरूरी है, ताकि देश एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर सके. सम्मेलन के दौरान रक्षा बलों द्वारा विकसित अत्याधुनिक और भविष्य की तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. साथ ही, भविष्य के युद्ध से जुड़े नए सिद्धांतों और परिचालन रणनीतियों से संबंधित दस्तावेज जारी किए जाएंगे.

इसी बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया. मुलाकात के उपरांत रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं. हाल के घटनाक्रम द्विपक्षीय सहयोग में सकारात्मक प्रगति को दर्शाते हैं. उन्होंने भविष्य में इस रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की आशा भी जताई.

ये भी पढ़ें :  बंगाल में सुवेंदु ही होंगे 'सत्ता के अधिकारी', जानें कैसे दूसरे दावेदारों पर पड़े भारी? 10 कारण

लेखक के बारे में
img
राजीव रंजन
Editor - Defence & Political Affairs
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Joint Commanders Conference, Operation Sindoor, Operation Sindoor Anniversary
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com