ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां के जिला मुख्यालय अस्पताल के परिसर से ही एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का मामला प्रकाश में आया है. सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर से इस तरह की दरिंदगी की घटना होने के बाद से पूरे झारसुगुड़ा जिले सहित पूरे राज्य में आम जनता और सामाजिक संगठनों के बीच भारी आक्रोश और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा गुस्सा देखा जा रहा है. हालांकि, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाई और मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है.
अस्पताल परिसर के भीतर से अपहरण और वारदात
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित लड़की अभी नाबालिग है. उसका एक रिश्तेदार बीमार था और जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती था. नाबालिग लड़की अस्पताल में उसी बीमार रिश्तेदार की देखरेख और मदद के लिए बतौर अटेंडेंट रुकी हुई थी. आरोप है कि अस्पताल परिसर के भीतर ही घात लगाए बैठे अपराधियों ने उस बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने की साजिश रची. आरोपी उसे अस्पताल परिसर के सुरक्षित दायरे से ही बहला-फुसलाकर या फिर जबरन अगवा कर किसी सुनसान जगह पर ले गए. वहां आरोपियों ने मासूमियत को तार-तार करते हुए उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी और रूह कंपा देने वाली वारदात को अंजाम दिया. जैसे ही इस पूरी घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस और अस्पताल प्रशासन को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कड़े पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता, संवेदनशीलता और जनता के बढ़ते गुस्से को भांपते हुए झारसुगुड़ा के उच्च पुलिस अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया. झारसुगुड़ा एयरपोर्ट थाना पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए तत्काल विशेष टीमों का गठन किया. पुलिस ने आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों जैसे कि मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज को खंगाला. इसके आधार पर पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और मुख्य आरोपियों को दबोच लिया. इस घिनौने अपराध में सीधे तौर पर शामिल आरोपियों के साथ-साथ उनकी मदद करने वाली एक महिला सहयोगी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस तरह पुलिस ने कुल तीन लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है.
पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की अत्यंत सख्त धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सभी आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और पुख्ता सुरक्षा की मांग
इस रूह कंपा देने वाली वारदात के बाद स्थानीय नागरिकों, महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए कराई जानी चाहिए ताकि दोषियों को जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी सजा मिल सके. इसके साथ ही लोगों ने सरकार से मांग की है कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, विशेषकर जिला मुख्यालय अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद बनाया जाए, सीसीटीवी कैमरे चालू रखे जाएं और सुरक्षा गार्ड्स की मुस्तैदी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में किसी भी लाचार मरीज या उनके तीमारदारों के साथ ऐसी किसी खौफनाक वारदात की पुनरावृत्ति न हो सके.
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