- चीन भारत को घेरने के लिए पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है
- चाइना-म्यांमार-बांग्लादेश इकनॉमिक कॉरिडोर से चीन बंगाल की खाड़ी के निकट पहुंचना चाहता है
- यह कॉरिडोर युन्नान प्रांत से शुरू होकर म्यांमार के मांडले और रखाइन प्रांत होते हुए बांग्लादेश तक जाएगा
चीन लंबे समय से भारत को घेरने की कोशिशों में जुटा रहा है. इसके लिए उसने भारत के पड़ोसी देशों को ही मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया है. कभी वह पाकिस्तान के साथ दोस्ती बढ़ाता है तो कभी नेपाल और बांग्लादेश को करीब लाना चाहता है. इसके लिए उसने कनेक्टिविटी को बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है. बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर उसने बनाया था. अब उसने बांग्लादेश और म्यांमार को भी साधने की कोशिश की है. इसके लिए वह चाइना-म्यांमार-बांग्लादेश इकनॉमिक कॉरिडोर बनाने की तैयारी में है. यदि इसका निर्माण हुआ तो चीन बंगाल की खाड़ी के काफी करीब तक पहुंच जाएगा. ऐसी स्थिति भारत की चिंता बढ़ाने वाली होगी.
बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान हाल ही में चीन के दौरे पर पहुंचे थे. इसी दौरान चाइना-म्यांमार-बांग्लादेश इकनॉमिक कॉरिडोर का प्रस्ताव आया था. चीनी विदेश मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताया है. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने कहा, 'हमने बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार कॉरिडोर पर 15 साल पहले प्रस्ताव रखा था. कुछ प्रगति भी हुई थी, लेकिन फिर कई कारणों से हमें वे नतीजे नहीं मिल पाए थे, जो हम चाहते थे.' भारत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यदि वे जुड़ना चाहें तो ऐसा हो सकता है. यह सभी के लिए खुला है.
म्यांमार होते हुए बांग्लादेश तक जाएगा कॉरिडोर
उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर का एक ही इरादा है कि कनेक्टिविटी बेहतर हो और आर्थिक सहयोग भी बेहतर हों. प्रस्तावित कॉरिडोर की शुरुआत चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी कुनमिंग से होगी और म्यांमार के मांडले तक जाएगा. यहां से यह दो हिस्सों में बंट जाएगा. एक हिस्सा यंगून तक जाएगा तो दूसरा हिस्सा म्यांमार के ही रखाइन प्रांत को जोड़ेगा. चीन चाहता है कि इस कॉरिडोर को और विस्तार मिले. यह म्यांमार के रखाइन से होते हुए बांग्लादेश के चटगांव और कॉक्स बाजार तक जाएगा.
1990 में भी आया था ऐसा प्रस्ताव, तब भारत का भी शामिल था नाम
दरअसल चीन का यह प्रोजेक्ट कोई नया ख्याल नहीं है. इससे पहले 1990 में भी उसने ऐसा प्रस्ताव रखा था, तब इसका नाम BCIM था. इसके तहत भारत को भी जोड़ने का प्रस्ताव था. तब जो रूटमैप सोचा गया था, उसके तहत यह कुनमिंग से निकलकर कोलकाता तक आता और बीच में म्यांमार के मांडले और बांग्लादेश की राजधानी ढाका तक जाता.हालांकि चीन और भारत के रिश्तों में सहजता नहीं रही है. ऐसे में चीन ने चुपचाप ही इस प्रस्ताव से कदम वापस खींच लिए थे. अब वह भारत के पड़ोसी देशों को लेकर नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि भारत के पड़ोसी देशों से कनेक्टिविटी के नाम पर अपना दखल वह बढ़ाना चाहता है. इसके अलावा उसकी कोशिश सार्क देशों में भारत के प्रभाव को भी कम करने की है.
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