- सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि नीतीश ने अपनी मर्जी से बिहार के CM पद से इस्तीफा दिया था, किसी दबाव में नहीं
- वर्ष दो हजार में नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, भाजपा ने उस समय उनका समर्थन किया था
- सम्राट चौधरी के अनुसार नीतीश कुमार अब भी बिहार एनडीए के नेता हैं और इस बात पर कोई विवाद नहीं है
नीतीश कुमार ने क्या बिहार के चीफ मिनिस्टर का पद भाजपा के दबाव में छोड़ा था? इस सवाल का जवाब बिहार में उनकी जगह लेने वाले सम्राट चौधरी ने खुद दिया है. उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से सीएम पद से इस्तीफा दिया था. उन्हें ऐसा करने के लिए कहा नहीं गया था और न ही उन पर ऐसा कोई दबाव था. उन्होंने पटना में एक मीडिया इवेंट में यह भी कहा कि नीतीश कुमार भले ही अब राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन अब भी वह बिहार एनडीए के नेता हैं और इस बात को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है.
सम्राट चौधरी ने कहा, 'नीतीश कुमार ने अपनी शर्तों से सीएम का पद छोड़ा था. हमने उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा था. यही नहीं वह यह भी मानते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने ही उन्हें पहली बार सीएम बनने का मौका दिया था, जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या उनसे अधिक थी. अब उसी तरह का भाव नीतीश कुमार ने जताया है.' सम्राट चौधरी ने कहा कि वर्ष 2000 में जब पहली बार नीतीश कुमार सीएम बने थे तो किसी को बहुमत नहीं मिला था. तब भाजपा ने समर्थन दिया और नीतीश कुमार सीएम बने थे. तब उनकी समता पार्टी होती थी, लेकिन बहुमत साबित न हो पाने के चलते यह सरकार एक सप्ताह तक ही चल सकी.
उन्होंने कहा कि भाजपा ने नीतीश कुमार का हमेशा समर्थन किया है और वह भी हमेशा साथ रहे. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का आशीर्वाद तो लालू यादव की आरजेडी को भी मिला था. उन्होंने कहा कि लालू यादव यदि बिहार का सीएम बने तो इसके लिए भी उन्हें भाजपा का आभारी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि तब दलित नेता राम सुंदर दास काफी मजबूत थे और उनकी जगह पर लालू यादव नेता बने थे. बता दें कि 1990 में लालू प्रसाद यादव जनता दल में थे. तब जनता दल की सरकार को भाजपा का ही बाहर से समर्थन मिला था. इससे पहले 1970 में राम सुंदर दास भी कुछ समय के लिए सीएम रहे थे. उन्हें प्राइम मिनिस्टर वीपी सिंह का समर्थन हासिल था. वह भी रेस में थे, लेकिन लालू यादव को मौका मिला था.
जनता दल के विधायकों की मीटिंग में नेता चुना जाना था. लालू प्रसाद यादव के मुकाबले करीबी अंतर से राम सुंदर दास हार गए थे. कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऊंची जाति के विधायकों ने लालू यादव का समर्थन कर दिया था. इसके अलावा रघुनाथ झा अहम थे और उनकी लॉबिंग से ही लालू को चांस मिला था. बता दें कि सम्राट चौधरी भी एक समय में आरजेडी में थे और उन्हें रबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बनने का चांस मिला था. वह तब सीएम बनी थीं, जब लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के केस में जेल जाना पड़ा था.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं